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सरकारी महकमों में नहीं चलेगा ‘दलित’ शब्द

सरकारी महकमों में अब नहीं चल पाएगा ‘दलित’ शब्द! केन्द्र सरकार ने इस बाबत राज्य सरकारों को पत्र लिखकर चेताया है। इस संदर्भ में केन्द्रीय मानव सांधन विकास मंत्रालय का एक पत्र बिहार सरकार के महकमों खासकर शिक्षा विभाग में भी पहुंचा है। इसमें कहा गया है कि आम बोल चाल का शब्द ‘दलित’ सरकारी कामकाज में भी अनुसूचित जाति की जगह धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है। मंत्रालय ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा इस संदर्भ में किए गए एतराज का हवाला देते हुए कहा है कि ‘दलित’ शब्द को अनुसूचित जाति का पर्याय नहीं समझा जाए और सरकारी कामकाज में इसका प्रयोग तत्काल रोक दिया जाए। आरक्षित पदों के नियम बदलेंगेड्ढr पटना (हि.टी.)। दूसरे चरण की शिक्षक बहाली में आरक्षित पदों को भरने का नियम बदलेगा। मानव संसाधन विकास विभाग ने इस संवेदनशील मुद्दे पर गंभीर विमर्श के बाद अबकी जिलावार नहीं, बल्कि नियोजनइकाईवार आरक्षण रोस्टर के पालन निर्णय लिया है। जानकारी के मुताबिक इस निर्णय पर सरकार की मुहर के लिए वित्त विभाग को पत्र लिखा गया है। उधर व्यावसायिक डिग्रीधारी पंचायत शिक्षकों की नौकरी बरकरार रहेगी। पटना हाईकोर्ट ने प्रकाश कुमार व अन्य की ओर से दायर रिट याचिका पर बुधवार को यह फैसला दिया। न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की एकल पीठ ने आवेदकोंको नौकरी पर वापस लेने तथा वेतन आदि का भुगतान करने का आदेश दिया। सीतामढ़ी के डीएसई ने व्यावसायिक डिग्री को इंटरमीडिएट के समकक्ष मानने से इंकार करते हुए वैसे सभी पंचायत शिक्षकों को नौकरी से हटाने का निर्देश जारी कर दिया था, जो व्यावसायिक डिग्री के आधार पर बहाल हुए थे। उनके वेतन के भुगतान पर भी रोक लगा दी गई थी।ड्ढr ड्ढr दूसरी आेर वरीय अधिकारियों का मानना है कि यदि पहले चरण की तरह शिक्षकों के नियोजन के लिए जिलावार आरक्षण रोस्टर का आधार तय किया जाएगा तो कई तरह की गंभीर तकनीकी परेशानियां खड़ी हो जाएंगी। सबसे पहले तो यही पता लगाना मुश्किल होगा कि लगभग 000 नियोजन इकाइयों में से किसमें किस बिन्दु तक रोस्टर का पालन हुआ और इस बार वहां के बैकलॉग के आधार पर कितने और किस कोटि के आरक्षित पदों को भरा जाए। लेकिन नियोजन इकाई के हिसाब से रोस्टर तैयार होने पर वहां की पिछली बार हुई बहाली का आसानी से पता चल जाएगा और तब उससे आगे के बिन्दु से आरक्षित और अनारक्षित पदों को भरना मुश्किल नहीं होगा। यह फामरूला अपनाए जाने पर किसी कोटि को कोई नुकसान भी नहीं होगा। एक अधिकारी के मुताबिक इसे इस तरह भी समझा जा सकता है कि यदि किसी नियोजन इकाई में दो या चार रिक्ितयां भी होंगी तो इस फामरूले के आधार पर अभ्यर्थियों के नियोजन में आरक्षण नियमों का पालन किया जा सकेगा। अलबत्ता उस समय सिर्फ इतना ध्यान रखना होगा कि पहले चरण में हुई बहाली के बाद नियमानुसार किस कोटि की बारी आती है। जानकारी के मुताबिक जिलों से भेजी गई रिक्ितयों का विभाग द्वारा किए गए आकलन के तहत दूसरे चरण में सभी तरह के शिक्षकों को मिलाकर लगभग हजार पदों पर बहाली होनी है। इनमें यदि पांच-सात प्रतिशत की गड़बड़ी मानी जाए तो यह संख्या लगभग 0 हजार बनती है। इसीमें लगभग 10 हजार पिछले बैकलॉग की संख्या भी शामिल है। दूसरी आेर पटना से वि.सं. के अनुसार वरीय अधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद सिंह एवं राजीव कुमार सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि व्यावसायिक कोर्स से पास उम्मीदवारों को इंडरमीडिएट के समकक्ष माना गया है लेकिन डीएसई ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर ऐसे पंचायत शिक्षकों को नौकरी से निकाल दिया।

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  • Web Title: सरकारी महकमों में नहीं चलेगा ‘दलित’ शब्द