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मधुबनी की अनपढ़ सुशीला लिख रही दूसरी किताब

सुशीला राय फिर किताब लिख रही हैं। यह खुलासा उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ से खास बातचीत में किया। साहित्य के आसमान पर चमकतीं सुशीला वही सितारा हैं, जिन्होंने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा। बिहार के मधुबनी जिले के एक गरीब व पिछड़ी अमात्य जाति में 36 साल पहले जन्मी सुशीला 24 वर्ष की उम्र तक पूर्ण रूप से निरक्षर थीं।ड्ढr ड्ढr अपनी निरक्षरता का एहसास पति व परिवार द्वारा उपेक्षित होने पर इतना तीव्र हुआ कि गांव के एक लड़के से 1में पढ़ना शुरू किया। जब साक्षर बन गईं तो पहली किताब पढ़ी ‘आलो आंधारि।’ इसे पढ़ने के बाद उन्हें खुद अपनी कहानी लिखने की इच्छा हुई। वे लिखने लगीं कि किस तरह काली होने और दस वर्षो तक बच्चा नहीं होने के कारण उनका जीवन अभिशाप बन गया था। यह आत्मकथात्मक किताब ‘एक अनपढ़ क हानी’ नाम से दो साल पहले रोशनाई प्रकाशन से छपी और सराही गई। वह किताब यह भी बताती है कि एक स्त्री जब शिक्षित होने लगती है तो उसके सक्षम होने की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो जाती है।ड्ढr ड्ढr सुशीला के जीवन के तजुर्बे, व्यथा-गाथा और संघर्ष बड़े-बड़े लेखकों को मात देने वाले हैं। सुशीला के लेखक बनने का सूत्र क हीं न क हीं तसलीमा नसरीन और बेबी हाल्दार से भी जुड़ता है। बेबी ने ‘आलो आंधारि’ लिखने के पहले जो एक मात्र पूरी किताब पढ़ी थी, वह थीतसलीमा की ‘आमार मेयेबेला’ और सुशीला ने लेखक बनने के पहले जो एक मात्र पूरी किताब पढ़ी, वह थी ‘आलो आंधारि।’ क्या दुनिया की सभी स्त्रियां, चाहे उच्च वर्ण-वर्ग की हों या निम्न वर्ग-वर्ण की, वे किसी एक धरातल पर आपस में नहीं जुड़तीं? सुशीला क हती हैं कि संसार की सभी स्त्रियों को क हीं न क हीं एक ही तरह का संघर्ष करना पड़ता है। कोलकाता में पांच वर्षो से पति और दो बच्चों के साथ रह रहीं सुशीला बताती हैं कि अब वे एक नई किताब लिख रही हैं। उन्होंने बताया, ‘नई किताब में कोलकाता और अपने गांव के जीवन को पकड़ना चाहती हूं। शुरू कोलकाता के भवानीपुर की झोपड़पट्टी से क रूंगी, जहां पांच माह रही। वहां पानी से लेकर बाथरूम तक की भारी दिक्कत थी। वहां के पड़ोसियों के बारे में, उनके संघर्ष के बारे में लिख रही हूं। अपने गांव के जीवन के बारे में, पड़ोसियों के बारे में, उनके संघर्ष के बारे में और इस तरह शहरी और ग्रामीण जीवन के अंतर पर भी लिखना चाहती हूं।’ं

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  • Web Title: मधुबनी की अनपढ़ सुशीला लिख रही दूसरी किताब