DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

टोनी के सिर था इराक पर चढ़ाई का भूत

इतिहास बहुत बेरहम होता है। वह कभी किसी को उसकी गलतियों के लिए क्षमा नहीं करता। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर सत्ता से अलग हो गए हैं। बुश यद्यपि अभी भी अमेरिका के राष्ट्रपति हैं। शायद इसी कारण टोनी ब्लेयर और जार्ज बुश दोनों के खिलाफ ब्रिटेन और अमेरिका के समाचारपत्रों में जानकार लोगों द्वारा रहस्योद्घाटन किया जा रहा है कि इन दोनों नेताआें ने बिना पूरी जानकारी के किस प्रकार इराक पर चढ़ाई कर दी थी। उन्होंने एक क्षण के लिए भी नहीं सोचा था कि इस लड़ाई का अंतत: क्या परिणाम होगा? पिछले कुछ सप्ताह से टोनी ब्लेयर के खिलाफ ब्रिटिश समाचारपत्रों में इराक युद्ध को लेकर लगातार लिखा जा रहा है। अब रहस्योद्घाटन हुआ है कि ब्रिटिश सरकार को इराक की असली राजनीतिक स्थिति का ज्ञान ही नहीं था, क्योंकि इराक पर चढ़ाई के 12 वर्ष पहले से इराक में ब्रिटेन का कोई दूतावास ही नहीं था। कोई राजदूत भी नहीं था, जो टोनी ब्लेयर को सही जानकारी दे पाता। विदेश नीति के मामले में ब्लेयर के मुख्य सलाहकार ऐसे व्यक्ित थे, जो इजरायल में थोड़े समय ही राजदूत थे। अरब देशों के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। ऐसे अनाड़ी की सलाह का भयानक परिणाम तो होना ही था। इराक पर चढ़ाई करने के चार महीने पहले 1नवम्बर, 2002 को ब्लेयर ने अपनी सरकार से बाहर के 6 विशेषज्ञों को सलाह के लिए बुलाया, जिन्हें इराक के बारे में पूरा ज्ञान था। सभी ने अपने संस्मरण में लिखा है कि टोनी ब्लेयर की बातों से ऐसा लगता था मानों जार्ज बुश के कहने पर उन्होंने मन बना लिया था कि इराक पर तो चढ़ाई करनी ही है, चाहे उसका जो भी परिणाम निकले। अत: उन सभी ने ब्लेयर से मात्र इतना कहा कि इराक पर चढ़ाई के दुष्परिणामों को भी नजरंदाज नहीं करना चाहिए। जिन विशेषज्ञों को सलाह के लिए आमंत्रित किया गया था, उनमें जार्ज जोफ थे, जो कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अरब मामलों के प्रोफेसर थे। इसके अलावा चार्ल्स ट्रिप और टोबी डॉज थे। अपने संस्मरण में जार्फ जोफ लिखते हैं कि हम तीनों ने ब्लेयर को एक ही तरह की सलाह दी, परन्तु ब्लेयर का ऐसा आक्रामक रुख था कि उनको कुछ भी समझाना बेकार था। जार्ज जोफ कहते हैं कि हमने ब्लेयर को यह समझाया कि इराक की जनता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी कि कोई विदेशी ताकत उन पर आक्रमण करे। जोफ का कहना था कि इससे ब्लेयर भड़क उठे और उन्होंने चिल्लाकर कहा कि सद्दाम एक राक्षस है, उसे जाना ही होगा। जोफ को ब्लेयर का यूं भड़कना बेमानी लगा। उन्होंने सोचा कि ब्लेयर नासमझ हैं और सच्चाई से मुंह मोड़ना चाहते हैं। जोफ संस्मरण में लिखते हैं कि वे उसी समय समझ गए कि प्रधानमंत्री ब्लेयर छिछले ज्ञान के कारण भयानक गलती कर बैठेंगे। बुश से वे बुरी तरह प्रभावित थे और उनका एक सूत्रीय प्रोग्राम था सद्दाम को सत्ता से हटाना। दूसरे विशेषज्ञ टोबी डॉज कहते हैं कि उन्होंने ब्लेयर को यह समझाने का भरपूर प्रयास किया कि सद्दाम हुसैन और उनके 60 सलाहकार तथा सहयोगी खराब हो सकते हैं। परंतु इराक की जनता का कोई दोष नहीं है। इराक पर चढ़ाई कर निदर्ोष जनता को क्यों बलि का बकरा बनाया जाए? परंतु ब्लेयर इससे सहमत नहीं थे। दूसरे विशेषज्ञ चार्ल्स ट्रीप अपने संस्मरण में लिखते हैं कि ब्लेयर इराक पर चढ़ाई करने के लिए उतावले थे और कुछ सुनने को तैयार नहीं थे। वे चाहते थे कि सभी विशेषज्ञ उनकी हां में हां मिलाएं और कहें कि इराक पर चढ़ाई करना एकदम उचित है। सभी विशेषज्ञ दुखी और अपमानित होकर इस मीटिंग से बाहर आए। सभी इस मत के थे कि ब्लेयर की मति मारी गई है और अज्ञानतावश वे इराक पर चढ़ाई करके अपना और ब्रिटेन का सत्यानाश करने जा रहे हैं। सेवानिवृत्त राजनयिकों तथा मीडिया ने ब्लेयर को बार-बार समझाया कि अरब देश विदेशियों की गुलामी कभी पसंद नहीं करेंगे। युद्ध समाप्त होते ही एक दो महीने के अंदर ब्रिटिश और अमेरिकी फौज को इराक से निकल जाना चाहिए और देश का प्रशासन स्थानीय लोगों के सुपुर्द कर देना चाहिए। अन्यथा सारे संसार में यह भावना फैलेगी कि इराकियों की भलाई के लिए नहीं, इराक के तेल के व्यापक भंडार पर कब्जा करने के लिए ब्रिटेन और अमेरिका ने इराक पर चढ़ाई की थी। परन्तु ब्लेयर को इस तरह की सलाह अच्छी नहीं लगी। नतीजा वही हुआ जिसका डर था। इराक युद्ध समाप्त होने के बाद टोनी ब्लेयर ब्रिटेन में बुरी तरह अलोकप्रिय हो गए और अन्त में बड़े बेआबरू होकर उन्हें प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र देना पड़ा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: टोनी के सिर था इराक पर चढ़ाई का भूत