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एससी-एसटी जिलों की खुल सकती है किस्मत

अनुसूचित जाति और जनजाति बहुल जिलों में उद्योग स्थापित करने वाले उद्यमियों के हक में केन्द्रीय वित्त मंत्री पी.चिदम्बरम अपने बजट में रियायतों का पिटारा खोल सकते हैं। दरअसल इस तरह का कोई भी अहम कदम उठाकर वे यह साबित करना चाहेंगे कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार सामाजिक रूप से पिछड़े हुए वर्गो के हितों को लेकर गम्भीर है। वह चाहती है कि देश की प्रगति का लाभ इन्हें भी मिले। नार्थ ब्लाक से छन-छनकर आ रही खबरों पर यकीन करें तो वित्त मंत्री देश के उन 120 जिलों में उद्योग स्थापित करने वाले उद्यमियों को बैंकों से सस्ती दरों पर ब्याज दिलवाने से लेकर उद्योग को स्थापित करने के पांच सालों तक टैक्स हॉलीडे जैसी अहम सुविधाएं देने का प्रस्ताव ला सकते हैं। दरअसल देश में 120 जिलों में एससी और एसटी आबादी 30 प्रतिशत से लेकर 65 प्रतिशत तक है। महाराष्ट्र के गढ़चिौली और नंदूरबार जिलों में इनकी आबादी 65 फीसदी तक है। कमोबेश इसी तरह की हालत मध्य प्रदेश के मंडला जिले की भी है। सूत्रों का कहना है कि केन्द्रीय सामाजिक न्याय मंत्री मीरा कुमार और केन्द्रीय इस्पात मंत्री रामविलास पासवान की तरफ से व्यक्ितगत तौर पर भी पी. चिदम्बरस से आग्रह किया जा चुका है कि वे उपयरुक्त जिलों में उद्योग लगाने के लिए तैयार उद्यमियों को बैंकों से सस्ते लोन और टैक्स में रियायतें दिलवाएं। खबर है कि इनके साथ ही अनुसूचित जाति-जनजाति कमीशन ने भी वित्त मंत्री से आग्रह किया है कि वे इस बाबत ठोस पहल करें। ऐसी किसी भी पहल का लाभ यह होगा कि छोटे-बड़े उद्योगपति इन जिलों में जाएंगे। जिसके चलते उन जिलों की स्थानीय जनता को रोजगार मिल सकेगा। इसके बाद प्राइवेट सेक्टर में अनुसूचित जाति और जनजाति और पिछड़े वर्गो से संबंध रखने वाले उम्मीदवारों को आरक्षण देने की मांग भी पहले की तरह से नहीं होगी।

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