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20-20 तो फन, असली तो टेस्ट क्रिकेट ही है- जोगिंदर

आईपीएल में पैसा तो मिलेगा ही साथ ही सीखने को भी खूब मिलेगा। 20-20 के मैच खेलकर हमारे खिलाड़ियांे का आत्मविश्वास बढ़ेगा और फिर वे किसी भी तरह के मैच में बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे। - इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने के बारे में यह टिप्पणी है हरियाणा के ऑलराउंडर जोगिंदर शर्मा की। भारती की 20-20 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य जोगिंदर का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट ही असली क्रिकेट है और 20-20 तो सिर्फ फन है। हरियाणा पुलिस के डीएसपी को चेन्नई की इंडिया सीमेंट टीम ने 225000 डॉलर की बोली लगाकर हासिल किया है। वह अब महेन्द्र सिंह धोनी के साथ आईपीएल में खेलेंगे। धोनी ही विश्व कप में उनके कप्तान थे और फाइनल में आखिरी आेवर उनसे करा कर गजब का भरोसा जताया था। इससे उत्साहित जोगिंदर ने कहा - मैं पैसे को बहुत ज्यादा महत्व नहीं देता हूं। मेरे लिए बड़े खिलाड़ियों के साथ खेलने का यह अच्छा मौका है। उनसे सीखने को मिलेगा। पैसा तो मिलना अच्छी बात है, लेकिन 20-20 में खेलना काफी कठिन होता है। गेंदबाजों को तो दित आती ही है। वहां शुरू से ही गेंदबाजी करना ऐसे होता है जैसे आप स्लॉग आेवरों में गेंद फेंक रहे हों। इसमें अच्छी गेंदबाजी करने का फायदा दूसरे सभी मैचों में मिलता है। जोगिंदर इस बात के लिए तो खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि वह 20-20 विश्व कप विजेता टीम के खिलाड़ी हैं। उन्होंने कहा - इससे मेरा नाम हुआ। लोग देखते ही पहचानने लगे हैं। खुशी भी हुई कि हमने इतिहास रचा। - जोगिंदर को इस बात से गिला है कि उन्हें एकदिवसीय मैचों में स्थापित होने के लिए पूरे मौके नहीं दिए गए। उन्होंने कहा - मुझे मौके का इंतजार है। तभी मैं अच्छा कर सकूंगा। मैं घरेलू मैचों में कहीं भी खेलता हूं तो अच्छा ही करता हूं।- जोगिंदर इस तथ्य को भी स्वीकारते हैं कि भारतीय टीम में वापसी करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा - राष्ट्रीय टीम में मुझे जगह बनानी है तो कुछ अनूठा प्रदर्शन करना ही होगा। टीम से बाहर होने को किस तरह से लेते हैं? जोगिंदर ने कहा - मेरी सोच यह है कि टीम से बाहर हुआ हूं तो मेरे अंदर ही कुछ कमी होगी। हर किसी की तरह ड्रॉप होने पर मैं भी सोचता हूं कि गलत हुआ, लेकिन दुख मनाने से तो बात बनेगी नही बनेगी। - मानसिक रूप से मजबूती के लिए क्या करते हैं? जोगिंदर ने तपाक से जवाब दिया - कुछ नहीं, मेरी परवरिश ही सुविधाआें के लिए जूझते हुए हुई है। जिससे मैं शुरू से ही मानसिक रूप से टफ रहा हूं। आपको बताता हूं कि मैं किस तरह दो-ढाई घंटे ट्रेन का सफर कर दिी में अभ्यास करने रोहतक से आता था। सुबह मैच के लिए घर से अंधेरे में ही निकलना और रात को देर से घर पहुंचना। छोटे शहरों के लड़के स्ट्रगल करके बड़े होते हैं, इसलिए वे काफी मजबूत होते हैं। लेकिन मीडिया भी बड़े खिलाड़ियों को ही पूछता है। एक बार सौरभ गांगुली और मैंने रणजी मैच में शतक बनाया, लेकिन टीवी और अखबारों में सौरभ के शतक की ही चर्चा थी। - यह बताने पर कि आपकी गेंदों की स्पीड को लेकर सवाल खड़े किए जाते हैं? जोगिंदर ने कहा - स्पीड जरूरी है या विकेट लेना। वैसे स्पीड बढ़ाने के लिए भी काम कर रहा हूं। अभी कटक में मैंने 133 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड निकाली थी। गंेदों की तेजी नहीं प्रदर्शन को देखना चाहिए। -ड्ढr भारतीय टीम में वापसी की कितनी उम्मीद है? जोगिंदर ने उम्मीद की किरण दिखाते हुए कहा - मैं टीम से ऐसा ड्रॉप नहीं हुआ हूं कि मुझे काफी मौके दिए गए हों। अगर ऐसा होता तो मुश्किल होता। मैं तो एक-दो मैच खेलकर ही बाहर हुआ हूं। मुझे पूरा विश्वास है कि बेहतर प्रदर्शन कर टीम में वापसी करूंगा। -ड्ढr

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