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और अमेरिका बेचना चाहता है मिसाइल

मिसाइल प्रौद्योगिकी के मामले में दशकों तक पिछड़ने और आकाश, त्रिशूल व नाग जैसी मिसाइलों के विकास में अवांछित देरी व आंशिक विफलता के बाद भारत अब कुछ मिसाइल टैक्नोलॉजी में अमेरिका जैसे उस्तादों के भी कान काटने लगा है। कम से कम ‘प्रद्यु््म्न’ अडवांस्ड एयर डिफेंस (एएडी) मिसाइल और ध्वनि की गति से तेज उड़ान भरने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के मामले में तो उसने अमेरिका की पेट्रियट अडवांस्ड कैपेबिलिटी-3 (पीएसी-3) और टॉमाहॉक क्रूज मिसाइल को पटखनी दे दी है। अब पीएसी-3 मिसाइल निर्माता कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने अपनी मिसाइल भारत को बेचने के प्रयास तेज कर दिए हैं। ऐसा भारत को आगे बढ़ने से रोकने के इरादे से किया जा रहा है। अमेरिका को लगता है कि भारत ऐसी मिसाइल के उसके बाजार पर कब्जा जमा सकता है। पीएसी-3 से बेहतर नतीजे देने वाली प्रद्युम्न मिसाइल अमेरिकी मिसाइल से सस्ती भी है। भारतीय एएडी मिसाइल में मीन-मेख निकालने की गुंजाइश न होने के कारण पीएसी-3 मिसाइल निर्माता कंपनी लॉकहीड मार्टिन अपने उत्पाद को ज्यादा असरदार बताने में जुटी है। कंपनी के एक अधिकारी ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि पीएसी-3 मिसाइल हमलावार मिसाइल को ही नष्ट नहीं करती बल्कि उसमें लगे वॉरहेड यानी बम को भी नष्ट कर देती है। उधर, डीआरडीआे के वैज्ञानिकों ने भी दावा किया है कि उनकी मिसाइल भी हमलावर मिसाइल को पूरी तरह नष्ट कर सकती है। अमेरिकी दावा करते हैं कि पीएसी-3 मिसाइल हमलावर मिसाइल से हैडऑन यानी सीधी टक्कर ले कर नष्ट करती है जबकि भारतीय प्रद्युम्न मिसाइल हमलावर मिसाइल के करीब पहुंच कर विस्फोट करती है जिसके प्रभाव से दुश्मन की मिसाइल नष्ट की जाती है।

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