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सूबे में गन्ना विकास कार्यक्रम को प्रभावित कर रहा केन्द्र

राज्य सरकार ने केन्द्र पर बिहार में गन्ना विकास कार्यक्रम को प्रभावित करने का आरोप लगाया है और तत्काल गन्ना नियंत्रण आदेश 1े प्रावधानों में किए गए संशोधन से बिहार को मुक्त करने की मांग की है। बिहार का मानना है कि केन्द्र के ताजे संशोधन से बिहार को इथेनॉल हब के रूप में विकसित करने के प्रयासों को तगड़ा झटका लग सकता है। गन्ना विकास राज्यमंत्री नीतीश मिश्रा ने केन्द्रीय कृषि, सार्वजनिक वितरण, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री शरद पवार को पत्र लिखकर अपना विरोध दर्ज करते हुए लिए गए निर्णय पर पुनर्विचार का अनुरोध किया है। केन्द्र द्वारा किए गए ताजा संशोधन के बाद गन्ना से सीधे इथेनॉल बनाने पर रोक लगा दी गई है।ड्ढr ड्ढr अब सिर्फ चीनी मिलों को ही इथेनॉल बनाने की अनुमति दी जाएगी। श्री मिश्रा ने श्री पवार को 3 अक्तूबर 2007 की वित्त मंत्रियों व गन्ना मंत्रियों की बैठक में किए गए उनके वायदे की भी याद दिलाई है जिसमें श्री पवार ने ब्राजील की तर्ज पर गन्ना के रस से सीधे इथेनॉल निर्माण की योजना का भरोसा दिया था। गुरुवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में केन्द्रीय मंत्री को भेजे गए पत्र की प्रति जारी करते हुए श्री मिश्रा ने कहा कि सूबे में इस समय 20 हजार करोड़ रुपए के निवेश से संबंधित परियोजनाएं प्राप्त हैं। इनमें 15 हजार करोड़ रुपए के प्रस्ताव सिर्फ इथेनॉल बनाने का है। अगर केन्द्र सरकार का निर्णय प्रभावी हुआ तो सूबे में निवेश प्रस्ताव पर गंभीर असर पड़ सकता है। मंत्री ने बताया कि श्री पवार से मुलाकात के लिए दो बार समय की मांग की गई, लेकिन सफलता नहीं मिलने के बाद यह पत्र लिखा गया है। उन्होंने इस मुद्दे पर सभी दलों से बिहार के हित में केन्द्र पर दबाव देने की भी अपील की।

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