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दोषी अफसर शीघ्र जेल भेजे जाएं

बिहार में सत्ता नाम की कोई चीज नहीं है। पिछले 25 वर्षो से छात्र अपने रिजल्ट के लिए दौड़ रहे हैं लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन कभी जांच के नाम पर तो कभी कुछ और के नाम पर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। सरकार ऐसे अधिकारियों को क्यों वेतन दे रही है। इन लोगों को पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। इन्हीं सब कारणों से बिहार के अधिकांश अभिभावक अपने बच्चे को जमीन जायदाद बेच कर राज्य के बाहर पढ़ाना चाहते हैं। उपरोक्त बातें गुरुवार को पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति बारिन घोष ने कहीं। संजय कुमार एवं अन्य की ओर से दायर अवमानना मामले पर सुनवाई के दौरान अदालत ने अपने गुस्से का इजहार करते हुए कहा कि ऐसे अधिकारियों को अविलम्ब जेल भेज देना चाहिए। विश्वविद्यालय के टी.आर. में छात्रों का अंक नहीं है तो इसका खामियाजा छात्र क्यों भुगतें। टीआर में अंक चढ़ाना विश्वविद्यालय प्रशासन का काम है। विदित है कि मुज्जफरपुर के तुर्की कालेज से 83-84 बी.एड. सत्र की परीक्षा दी थी।जाली नामांकन कह कर उनके परीक्षाफल पर रोक लगा दी।ड्ढr ड्ढr बाद में हाईकोर्ट मे रिट याचिका दायर किए जाने पर जांच की बात विश्वविद्यालय की ओर से कही गई। जांच में छात्रों का नामांकन सही पाए जाने पर भी रिजल्ट का प्रकाशन नहीं किया गया। अवमानना अर्जी दायर किए जाने के बाद अदालत ने बीआर बिहार विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार एवं परीक्षा नियंत्रक को अदालत में हाजिर होने का निर्देश जारी किया था। बुधवार को दोनों अधिकारियों को जेल भेजने का आदेश भी दे दिया गया था। लेकिन सरकारी वकील के अनुरोध पर अदालत ने अपना आदेश वापस ले लिया था। गुरुवार को मामले पर सुनवाई के बाद अदालत ने सोमवार तक के लिए मामले की सुनवाई टालते हुए परीक्षाफल लेकर आने का आदेश दोनों अधिकारियों को दिया।ं

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