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class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आरपीएफ-अवैध वेण्डरों की मिलीभगत का यह नमूना है। अवैध कमाई के चक्कर में असली वेण्डर शिवनाथ गुप्ता को मुगलसराय में चलती ट्रेन से फेंक दिया गया। वह तड़पता रहा। गाँव वालों की मदद से अस्पताल पहुँचा। इलाज अब भी चल रहा है, लेकिन इतनी बड़ी वारदात को सुरक्षा एजेंसियाँ पचा गईं जबकि यह मसला मीडिया में भी छाया रहा। घायल के घर में ऐसा कोई नहीं, जो पैरवी करता। अब मानवाधिकार संगठनों ने शिवनाथ गुप्ता को न्याय दिलाने की पहल की है।ड्ढr चार बच्चों का पिता शिवनाथ मुगलसराय का रहने वाला है। बीते साल 21 अगस्त को वह मुगलसराय रेलवे स्टेशन पर खड़ी जनशक्ित एक्सप्रेस में सवार ही हुआ था। तभी आरपीएफ का दस्ता भी आ गया। शिवनाथ गुप्ता के साथियों को गाली-गलौज के बाद ट्रेन से उतार दिया। इस बीच ट्रेन चल पड़ी। तब आरपीएफ दस्ते के लोगों ने उसे गाड़ी रोकने के लिए कहा। मना करने पर दो लोग आए और शिवनाथ को ट्रेन से नीचे फेंक दिया। आरोप है कि ये अवैध वेण्डर थे, जो आरपीएफ की मिलीभगत से काम करते हैं। कई बार आरपीएफ के लोग चलती ट्रेन रोकवाकर उसी जुर्म में वेण्डर्स को जेल भेज गुडवर्क भी कर लेते हैं। यह सब कुछ आरपीएफ दस्ते के सामने हुआ लेकिन जवानों ने कुछ नहीं किया। मुकुन्द मेनन मीडिया फेलोशिप के तहत की गई पड़ताल में पता चला कि बाद में ग्रामीणों ने उसे अस्पताल पहुँचाया। पहले मुगलसराय फिर वाराणसी में इलाज हुआ। बाएँ पैर की हड्डी टूट गई थी। इस दौरान शिवनाथ के मासूम बच्चे परेशान रहे। घर में कोई ऐसा था नहीं जो मामले की पैरवी करता। तब मानवाधिकार संगठन आगे आए। ताजी स्थिति यह है कि छह महीने बाद भी यह मामला सरकारी दस्तावेजों में दर्ज नहीं हो पाया।

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