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अब लक्ष्य सीरीचा जीतना

महेन्द्र सिंह धोनी की अगुवाई में अब तक कई अभेद्य किले ध्वस्त कर चुकी टीम इंडिया शुक्रवार को यहां न्यूजीलैंड में 41 वर्ष के सूखे को समाप्त करने के लक्ष्य के साथ उतरेगी। मेहमान टीम वेलिंगटन में पहला टेस्ट दस विकेट से जीतने और नेपियर में दूसरा टेस्ट ड्रा कराने के बाद सीरीा में 1-0 से आगे है। भारत यदि तीसरे टेस्ट को ड्रा कराने में भी सफल रहता है तो 1े बाद पहली बार न्यूजीलैंड की जमीन पर टेस्ट सीरीा जीतने का सपना पूरा हो जाएगा। भारत ने 1में मंसूर अली खां पटौदी की कप्तानी में टेस्ट सीरीज पर कब्जा किया था। भारत वेलिंगटन में जब तीसरा टेस्ट खेलने उतरेगा तो उसके सामने इस मैदान पर 1ा इतिहास होगा। भारत ने इस मैदान में अपने खेले पांच टेस्ट में से जो एक टेस्ट जीता है वह उसने 1में ही जीता था। इस जीत के बाद भारत ने इस मैदान पर चार और टेस्ट खेले लेकिन चारों में ही उसे शिकस्त झेलनी पड़ी। भारत इस मैदान पर भले ही पिछले चार दशक में कोई टेस्ट नहीं जीत पाया है लेकिन उसने जिस अंदाज में नेपियर में फालोआन खेलने के बाद दूसरा टेस्ट सम्मानजनक तरीके से ड्रा कराया उससे यह संभावना प्रबल हो गई है कि टीम इंडिया यहां 1ी पटौदी की जीत का इतिहास इस बार दोहरा सकती है। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात कप्तान धोनी की फिटनेस है। अभी वह पीठ की चोट से पूरी तरह उबरे नहीं हैं और उनका तीसरे टेस्ट में खेलना तय नहीं है। पीठ की चोट के कारण धोनी दूसरा टेस्ट नहीं खेल पाए थे। हालांकि उनकी हालत में काफी सुधार हुआ है लेकिन उनका कल खेल पाना संदिग्ध है। हालांकि उन्होंने सपोर्ट पहनकर गुरुवार को बेसिन रिजर्व में नेट प्रेक्िटस की और ऐसे संकेत दिए कि वह तीसरे टेस्ट में खेल सकते हैं। उन्होंने कहा कि मेरी स्थिति में काफी सुधार आया है। लेकिन मेरे खेलने के बारे में खेल शुरू होने से पहले ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एकदिवसीय मैच में आप केवल 50 ओवर खेलते होते हैं लेकिन टेस्ट में आपको 120 ओवर खेलने के लिए भी तैयार रहना पड़ता है। खेलने के बारे में कोई निर्णय लेने के लिए मुझे कल सुबह तक का इंतजार करना पड़ेगा। धोनी की अनुपस्थिति में टीम इंडिया को यहां भी नेपियर जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है जहां कार्यवाहक कप्तान वीरेन्द्र सहवाग की अगुवाई में टीम को फालोआन खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा था। लेकिन धोनी का कहना है कि उनकी अनुपस्थिति में टीम कमजोर नहीं होगी। उन्होंने कहा कि मैं ऐसा खिलाड़ी नहीं हूं जिस पर टीम बहुत अधिक निर्भर रहती है। मैं चाहे खेलूं या नहीं, इसका टीम पर कोई बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ता है।टीम इंडिया की दो वाल राहुल द्रविड़ और गौतम गंभीर खेल रहे हैं। उसे देखते हुए मेजबान टीम के लिए वेलिंगटन टेस्ट जीत पाना बहुत मुश्किल काम होगा। जबर्दस्त फार्म में चल रहे मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के बल्ले का जादू वेलिंगटन में खूब चलता है।वेलिंगटन के मैदान पर सचिन भारतीयों में सबसे बढ़िया रिकार्ड रखते हैं। उन्होंने इस मैदान पर दो टेस्टों में 54.75 के औसत से 21रन बनाए जिनमें एक शतक और एक अर्धशतक शामिल है। मौजूदा सीरीा में सचिन अब तक दो टेस्टों में 00 के औसत से 273 रन बना चुके हैं। इनमें हेमिल्टन के पहले टेस्ट में 160 रन की मैच जिताने वाली पारी शामिल है। सचिन ने नेपियर टेस्ट में दोनों पारियों में 4और 64 रन बनाए थे। भारत के लिए थोड़ी चिंता की बात विस्फोटक ओपनर वीरेंद्र सहवाग का जल्दी जल्दी आउट हो जाना है। यदि सहवाग तीसरे टेस्ट में अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप जोरदार बल्लेबाजी करते हैं तो यह भारत के लिए सोने पे सुहागा जैसे होगा।

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