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कीमतों के दबाव में सुरजमुखी तेल पर घटेगा सीमा शुल्क

खाद्य तेलों की आसमान छूती कीमतों के चलते पामोलीन और सोयाबीन तेल के लिए शुल्क निर्धारण की दर (टैरिफ रेट वैल्यू) को पिछले डेढ़ साल से स्थिर कर सरकार भूल गई है कि सुरजमुखी तेल के आयात पर लग रहा वास्तविक शुल्क उक्त दोनों के दोगुना से भी अधिक है। आगामी बजट (2008-0में इस भूल को सुधारे जाने की संभावना है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक सुरजमुखी तेल पर लागू 41.2 फीसदी की सीमा शुल्क दर में 20 फीसदी तक की कटौती हो सकती है। उक्त सूत्र के मुताबिक सुरजमुखी तेल के टैरिफ वैल्यू व्यवस्था से बाहर रहने के कारण उसकी वास्तविक आयात कीमत पर शुल्क लगाया जा रहा है। जबकि पामोलीन और सोयाबीन तेल की आयात कीमत के करीब एक तिहाई पर ही शुल्क लगाया जा रहा है। इस समय क्रूड पॉम ऑयल (सीपीओ) की मुंबई पहुंच कीमत (सीआईएफ) 110 डॉलर प्रति टन है। लेकिन सीमा शुल्क निर्धारण के लिए इसका टैरिफ रेट वैल्यू 447 डॉलर प्रति टन है जो 31 जुलाई, 2006 से स्थिर है। इसी तरह आरबीडी पॉमोलीन की आयातित कीमत 1280 डॉलर प्रति टन है। इसका टैरिफ रेट वैल्यू 484 डॉलर प्रति टन पर स्थिर है। सीपीओ पर 46.35 फीसदी की दर से सीमा शुल्क लागू है। लेकिन मौजूदा आयात मूल्य पर सीमा शुल्क की वास्तविक दर केवल 17.5 फीसदी बैठती है। इसी तरह पॉमोलीन के मामले में 54.075 फीसदी की सीमा शुल्क दर के मुकाबले वास्तविक सीमा शुल्क की दर केवल 20.45 फीसदी बैठती है। वहीं क्रूड सोयाबीन तेल की मुंबई पहुंच आयात कीमत 1450 डॉलर प्रति टन है। इस पर 40 फीसदी का सीमा शुल्क लागू है। लेकिन इसकी टैरिफ रेट वैल्यू 31 जुलाई, 2006 से 580 डॉलर प्रति टन पर स्थिर है। इसकी वास्तविक सीमा शुल्क दर 16 फीसदी बैठती है। वहीं इनके उलट सुरजमुखी तेल की 1750 डॉलर प्रति टन की आयात कीमत पर ही 41.2 फीसदी का सीमा शुल्क लागू है क्योंकि यह टैरिफ रेट वैल्यू व्यवस्था से बाहर है। इससे सुरजमुखी तेल पर सीमा शुल्क की दर बाकी तेलों के मुकाबले दोगुना से भी अधिक है। यही वह आधार है जिसके चलते वित्त मंत्री पी. चिदंबरम आगामी बजट में इस पर लागू सीमा शुल्क दर में कटौती करसकते हैं। कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि खाद्य तेल आयातकों द्वारा अंडर इनवायसिंग करने की सूचना आने पर टैरिफ रेट वैल्यू व्यवस्था लागू की गई थी। इसका निर्धारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों मे होने वाले बदलाव के फामरूले से होता था। लेकिन खाद्य तेलों की आसमान छूती कीमतों के चलते अब सरकार खुद अंडरइनवायसिंग करवा रही है और इससे सीमा शुल्क का नुकसान हो रहा है। वास्तविक कीमत पर अधिक सीमा शुल्क मिलता जिसका उपयोग देश में तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए होने से खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता में कमी आती।

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  • Web Title: दबाव में सुरजमुखी तेल पर घटेगा सीमा शुल्क