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दोबारा अपराध करने पर जमानत रद्द

जमानत पर छूटने के बाद फिर अपराध करने वालों की जमानत रद्द होगी। राज्य सरकार ने इस दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी है। कानून एवं व्यवस्था के उल्लघंन की आशंका में कमी लाने के लिए आपराधिक दंड संहिता की धारा 107 और 110 के तहत कार्रवाई की जा रही है। बिहार विधान सभा के बजट सत्र के पहले दिन सदन में पेश आर्थिक सर्वेक्षण (2007-08) रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कानून और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके तहत अनुमंडल दंडाधिकारियों तथा कार्यपालक दंडाधिकारियों ने आपराधिक दंड संहिता की धारा 107 के तहत 87,351 व्यक्ितयों पर कार्रवाई की है। इनमें से 26,62व्यक्ितयों को बांड भरने एवं सीमा में रहने को कहा गया है। इसी प्रकार आपराधिक दंड संहिता की धारा 110 के तहत 1व्यक्ितयों पर कार्रवाई शुरू की गयी है, जिनमें से 508 लोगों को बांड भरने एवं सीमा में रहने की हिदायत दी गयी है। धारा 110 के उपयोग को कई दशकों बाद पुनर्जीवित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार गत दो वर्षो में हत्या, डकैती, लूट, फिरौती के लिए अपहरण, सड़क डकैती, सड़क लूट आदि गंभीर अपराधों में गिरावट आई है। वर्ष 2006 की अपेक्षा हत्या के मामलों में 12 फीसदी, फिरौती-अपहरण के मामले में 54 प्रतिशत, डकैती में 33 प्रतिशत, सड़क डकैती में 28 प्रतिशत, सेंधमारी में 8 प्रतिशत और चोरी में 6 प्रतिशत की गिरावट आई है। ड्ढr रांची के आईजी व पुलिसकर्मियों से जवाब तलबड्ढr पटना (वि.सं.)। केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के जज श्री बी.वी. राव को आतंकवादी बताकर उनके साथ अपमान जनक व्यवहार करने के मामले में कैट ने रांची के आई. जी. निर्मला अमिताभ चौधरी एवं अन्य पुलिस कर्मियों के विरुद्ध अवमानना कर मामला प्रारंभ किया। कैट के उपाध्यक्ष न्यायमूर्ति पी.के. सिन्हा तथा सदस्य अमित कुशेरी की खण्डपीठ ने स्वत: मामला दर्ज करते हुए निर्मला चौधरी तथा घटना में शामिल पुलिस कर्मियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया कि उन्हें क्यों नहीं दंडित किया जाये। केन्द्रीय सरकार के वरीय स्थायी सलाहकार मनन कुमार मिश्र तथा अपर स्थायी सलाहकार दिवेदी सुरेन्द्र ने खण्डपीठ से कहा कि ऐसे पुलिस अधिकारी और कर्मियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। मामले पर पुन: सोमवार को सुनवाई होगी। उधर घटना के विरोध में पटना स्थित कैट बार एसोसिएशन के आह्वान पर वकीलों ने अपना काम नहीं किया। इसलिए कैट का न्यायिक काम पूरी तरह बाधित रहा। एसोसिएशन के संयोजक अधिवक्ता एम. पी.दीक्षित ने घटना की जानकारी देने हुए बनाया कि श्री राव बंगलोर कैट के जज हैं और रांची स्थित कैट के स*++++++++++++++++++++++++++++र्*ट कोर्ट में सुनवाई के लिए गए थे। उन्होंने घूस घटना की निंदा करते हुए कहा कि जज के साथ बदसलूकी करने वाले पुलिस अधिकारियों को सख्त सजा दी जानी चाहिए। अधिवक्ता संजय कुमार बरियार, हेमंत कुमार, जी के अग्रवाल, महेश्वर धर दिवेदी, अमरनाथ झा सहित अनेक वकीलों ने घटना की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि गुरुवार की रात जब श्री राव गेस्ट हाउस स्थित अपने कमरे में सोए हुए थे तो अचानक झारखण्ड विद्युत बोर्ड निगरानी की आई. जी. निर्मला चौधरी ने अपने सुरक्षा बलों से कहा कि उपर के कमरे में आतंकवादी घुस गया है। इसी पर श्री राव के कमरे को सुरक्षा गाडोर्ं ने घेर लिया और उनको बाहर खींच लिया।ं

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