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झारखंड से उत्पादों के निर्यात की अपार संभावनाएं

झारखंड से निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। जरूरत इस बात की है कि इसके लिए उत्पादों को चिह्न्ति कर ठोस प्रयास किये जायें। लाह, हैंडीक्राफ्ट, औषधीय जड़ी-बूटी, तसर, सिल्क, खादी और अन्य स्थानीय उत्पादों को निर्यात के जरिये बड़ा बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है। ये बातें कनफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज (सीआइआइ) की ओर से शुक्रवार को आयोजित ‘निर्यात की संभावनाएं’ विषयक सेमिनार में सामने आयीं। तय किया गया कि जिन उत्पादों का निर्यात हो सकता है, उसकी सूची बनायी जाये।ड्ढr वक्ताओं ने कहा कि स्पेशल इकोनोमिक जोन, सॉफ्ट टेक्नोलाजी पार्क की स्थापना से निर्यात की संभावनाएं और बढ़ेंगी। राज्य सरकार को निर्यात को बढ़ावा देने के लिए करों को लचीला बनाना चाहिए। वैट और सेल्स टैक्स में भी छूट दी जानी चाहिए। सीआइआइ की जोनल काउंसिल के एमके देशमुख ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आपसी विचारों के आदान-प्रदान पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से एमएस धौनी क्रिकेट में झारखंड का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उसी तरह उद्यमी भी उद्योग में प्रतिनिधित्व करें। उद्योग निदेशक सुनील कुमार ने राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक विकास के लिए उठाये जा रहे कदम की जानकारी दी। उद्योग विशेष सचिव धीरेंद्र कुमार ने कहा कि गांवों की कला को उठाकर विदेशों तक पहुंचाने में झारक्राफ्ट अपनी भूमिका निभा रहा है। नाबार्ड के सीजीएम केसी शशिधर ने कहा कि उत्पादों की पहचान कर वित्तीय सहायता दी जानी चाहिए। सेमिनार के संयोजक इलाहाबाद बैंक के डीजीएम पीएस भाटिया ने वित्तीय सहायता की जरूरत वाले निर्यातकों का स्वागत किया। इलाहाबाद बैंक के चीफ मैनेजर आरएन सिंह ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सहयोग का वादा किया। इसके अलावा सीआइआइ के वीके गडय़ान, एक्िसस बैंक के जोगिंदर सिंह, आरबीआइ पटना के जीएम सीएम बालपेयी ने भी सेमिनार को संबोधित किया। छोटानागपुर रोप वक्र्स के सिद्धार्थ झंवर ने उद्योगों की समस्यायें गिनायीं। धन्यवाद ज्ञापन गडय़ान ने किया।

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