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‘अदालतें सुप्रीम कोर्ट का निर्णय मानने को बाध्य’

उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालयों से कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत देश की सभी अदालतें और प्रशासन उसके निर्णय को मानने के लिए बाध्य हैं। न्यायमूर्ति अरिजित पसायत और न्यायमूर्ति पी सदाशिवम की पीठ ने दहेज हत्या के आरोपी को बरी करने के निचली अदालत के निर्णय के विरूद्ध अपील की राजस्थान सरकार को अनुमति न देने के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय की शुक्रवार को खिंचाई भी की। उच्चतम न्यायालय ने आरोपी को बरी करने के निर्णय के विरूद्ध राय सरकार को अपील करने की अनुमति न देने का कारण न बताने के लिए उच्च न्यायालय के उक्त निर्णय को रद्द भी कर दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार पीड़ित महिला की कम दहेज लाने के लिए हत्या करने के बाद उसका शव कुएं में फेंक दिया गया था। निचली अदालत ने इस मामले के आरोपियों रोहितास और अन्य को बरी कर दिया था। राय सरकार ने निचली अदालत द्वारा दहेज हत्या के आरोपियों को बरी करने के निर्णय के विरूद्ध आपराधिक दंड संहिता की धारा 378 (1) के तहत उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उच्चतम न्यायालय ने मामले को पुन: उच्च न्यायालय में भेजते हुए इस पर कानून के तहत फिर से निर्णय करने का निर्देश दिया और कारणों का उल्लेख किए बिना निर्णय देने की अदालतों की बढ़ती प्रवृत्ति पर असहमति भी व्यक्त की।

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