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हमारे इस्तीफे से सरकार सोचने पर मजबूर होगी

हा जा रहा है कि आपने इस्तीफा तब दिया, जब आपका कार्यकाल ही खत्म होने वाला था? आप मेरे इस्तीफे की अपने तरीके से व्याख्या कर सक ते हैं। पर मैने और मेरे तीन और सहयोगियों ने इस्तीफा देकर सरकार को यह बताने की चेष्टा की है कि जब वह दिल्ली अर्बन आर्ट कमीशन की नई टीम चुने तो इस बात पर विचार कर ले कि क्या उसे ऐसी टीम चाहिए, जो उसके हर फैसले पर अपनी मोहर बिना किसी आपत्ति या विरोध के लगाती रहे। मैं मानता हूं कि हमारे इस्तीफे के बाद उसे सोचने पर बाध्य होना पड़ेगा। आप पर सीधा-सीधा आरोप है कि आप मुम्बई में बैठकर दिल्ली की योजनाओं पर अपनी टिप्पणी देते हैं? यह तो ठीक है कि मैं मुम्बई में रहता हूं और दिल्ली तीन महीने के बाद ही आ पाता था डीयूएसी की बैठकों में शिरकत करने के लिए। जब सरकार ने मेरी नियुक्ित से पहले मेरे से पूछा था तब मैने साफ तौर पर कह दिया था कि मेरे लिए दिल्ली में रहना मुमकिन नहीं होगा। हां, मैं इधर की तमाम परियोजनाओं को लेकर अपनी राय अवश्य देता रहूंगा, अध्ययन करने के बाद। कहा जाता है कि स्थापना के बाद से ही डीयूएसी एक तरह से सरकार की जेबी संस्था के रूप में काम करता रहा है? मै ऐसा नहीं मानता। हमारी सलाह और सिफारिशों का लगातार असर होता रहा है। हमारे कड़े विरोध के चलते हुए भी राष्ट्रीय पुलिस स्मारक को ध्वस्त कर दिया गया।हमें लगा कि राष्ट्रीय पुलिस स्मारक को जिस तरह से बनाया गया है, उसे लुटियंस जोन की सुंदरता चौपट होगी। हमारी ही सिफारिश पर दिल्ली नगर निगम के मिन्टो रोड में बन रहे मुख्यालय की ऊंचाई को कम किया गया ताकि संसद भवन से जामा मस्जिद का नजारा देखा जा सके। आपने टनल रोड प्रोजेक्ट और कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज का कड़ा विरोध किया था? हम चाहते थे कि जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के पास ही खेल गांव का निर्माण हो। हद तो तब हो गई, जब खेल गांव को यमुना नदी के साथ बनाने के फैसले पर हमारे विरोध पर किसी ने गौर करने की जरूरत तक नहीं समझी।

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