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अंधा बना सकती है क्लोरोक्वीन की गोली

सहरसा में शनिवार से शुरू 1वें शिशु रोग विशेषज्ञों के राज्य स्तरीय सम्मेलन में बिहार सहित देश में तेजी से फैल रहे कालाजार और मलेरिया के प्रकोप को खतरनाक बताया गया है। इससे बचने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ-साथ लोगों को भी जागरूक बनने की सलाह विशेषज्ञों ने दी है। शहर के होटल विजया परिसर में दो दिनों तक चलने वाले राज्यस्तरीय सम्मेलन के वैज्ञानिक सत्र का उद्घाटन देश के जाने-माने चिकित्सक और सेंट्रल स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसीन कोलकाता के निदेशक डा. ए. नंदी ने किया। उन्होंने मलेरिया के बढ़ते प्रकोप पर नियंत्रण और नयी दवाआें के प्रयोग का सुझाव सम्मेलन में आये शिशु रोग विशेषज्ञों को दिया।ड्ढr ड्ढr डा. नंदी ने साफ शब्दों में मलेरिया के लिए उपयोग में लायी जाने वाली दवा ‘क्लोरोक्वीन’ को बंद कर देने का सुझाव दिया। डा. नंदी ने कहा कि आज भी सेना में मलेरिया से बचने के लिए बड़ी मात्रा में क्लोरोक्वीन की सप्लाई की जा रही है। इससे मलेरिया पीड़ित को फायदा कम साइड इफेक्ट ज्यादा हो रहा है। उन्होंने कहा कि इससे आंख की रोशनी जाने का खतरा है। वैज्ञानिक सत्र में डा. नंदी ने क्लोरोक्वीन की जगह नयी दवा लूमीफेंट्रीन, ऐटीमीथर के उपयोग की सलाह दी। वैज्ञानिक सत्र में इंडियन एकेडमी ऑफ पेडियाट्रिक्स के सदस्य पटना के शिशु रोग विशेषज्ञ डा. उत्पल कांत सिंह ने ‘‘डा. गोपाल शरण आेरेशन अवार्ड’’ कालाजार बीमारी की रोकथाम और नयी दवाइयों के संबंध में व्याख्यान दिया। डा. सिंह ने कहा कि कालाजार में पहले दी जाने वाली दवाई ‘स्टीबानटे’ का असर अब खत्म हो रहा है। उन्होंने कहा कि नयी दवा ‘पैरोमोमाइसीन’ मिल्टीफोसीन और एन फोटेरीसीन कालाजार के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ है। डा. उत्पल कांत ने कहा कि हर वर्ष देश में कालाजार के 5 लाख मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जिसमें 50 प्रतिशत केस बच्चों में पाये जा रहे हैं। उन्होंने कालाजार टेस्ट के लिए आर.के. 3े उपयोग की सलाह दी।ड्ढr ड्ढr सम्मेलन में आईएपी के पूर्व अध्यक्ष डा. ए.के. ठाकुर ने बच्चों में बुखार और इसके उपचार के नवीनतम तकनीक की जानकारी दी। वहीं नालंदा मेडिकल कॉलेज के प्राध्यापक भारतीय शिशु अकादमी बिहार ब्रांच के सचिव डा. ए.के. जयसवाल ने नवजात शिशु में मिर्गी की बीमारी, पीएमसीएच के एचआेडी डा. संजाता राय चौधरी ने शिशुआें में अज्ञात बीमारी, डा. एस.ए. कृष्णा ने नये काटिको स्ट्राईड पर व्याख्यान दिया। वैज्ञानिक सत्र के उद्घाटन समारोह में आईएपी के अध्यक्ष डा. शशिभूषण प्र. सिंह, सचिव डा. बी.पी. जयसवाल मौजूद थे।

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