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साहित्यकारों की जयंती भी राजकीय समारोह के रूप में मनेगी : अश्विनी

मैथिली भाषा-साहित्य का सर्वोच्च पुरस्कार ‘प्रबोध साहित्य सम्मान-08’ शनिवार को मैथिली के प्रसिद्ध साहित्यकार व आलोचक मोहन भारद्वाज को प्रदान किया गया। नगर विकास मंत्री अश्विनी कुमारचौबे व पटना हाईकोर्ट की जज न्यायमूर्ति मृदुला मिश्र ने एक सादे समारोह में श्री भारद्वाज को स्वस्ति फाउंडेशन की तरफ से एक लाख रुपए का चेक व स्मृतिचिह्न् प्रदान किया।ड्ढr ड्ढr इस मौके पर रवीन्द्र भवन में आयोजित समारोह में मंत्री श्री चौबे ने कहा कि जब तक मैथली, मगही, भोजपुरी, बज्जिका व अंगिका समेत सभी आंचलिक भाषाओं का विकास नहीं होगा हिन्दी भी मजबूत नहीं होगी। राज्य सरकार इन भाषाओं को भी सम्मान दिलाएगी। साहित्य जगत के विभूतियों की जयंती व पुण्यतिथि भी अब राजकीय समारोह के रूप में मनेगी। इनकी प्रतिमाएं भी लगायी जाएंगी। विद्यापति गीत ‘जय-जय भैरवी’ से अभिभूत मंत्री ने कहा कि यह सिर्फ गीत ही नहीं बल्कि पूरा संस्कार, साहित्य व संस्कृति है। मैथली को अष्टम सूची में शामिल किए जाने व बीपीएससी की भाषा बनाए जाने पर कहा कि यह अटल सरकार व प्रदेश की राजग सरकार की बड़ी उपलब्धि है। यह भाषा बहुत ही आत्मीय व मधुर है जिसका कोई जोड़ नहीं है।ड्ढr ड्ढr पटना हाईकोर्ट की जज न्यायमूर्ति मृदुला मिश्र ने कहा कि साहित्य में आलोचना का बड़ा महत्व है। इसे साहित्य का दर्पण कहा जाता है क्योंकि इसके बिना साहित्य का उत्तरोत्तर विकास नहीं हो सकता है।श्री मोहन भारद्वाज ने स्वस्ति फाउंडेशन के प्रति आभार प्रकट करते हुए स्व. प्रबोध नारायण सिंह के साथ अपने संस्मरण सुनाए। उन्होंने कहा कि स्व. सिंह की पत्नी अणिमा सिंह का लोकगीत को प्रतिष्ठित करने में विशेष योगदान है। इस अवसर पर फाउंडेशन के प्रबंध न्यासी डा.अभय नारायण सिंह, भागलपुर के आयकर आयुक्त अजय कुमार सिंह, विधायक विनोद नाराण झा, किशोर कुमार मुन्ना, पं. गोविंद झा, पूर्व विधायक विजय कुमार मिश्र भी उपस्थित थे। इस अवसर पर ‘मधुरमनि’ लघु कथाचित्र का प्रदर्शन व नचिकेता लिखित नाटक ‘प्रयोग ’ का मंचन भी किया गया।

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