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मदरसों के बच्चों के हौसलों को मिली उड़ान!

बचपन से ही आर्थिक तंगी के दौर से गुजरने वाली रजिया अब खुश है कि वह टेलरिंग का काम करके अपने अब्बू-अम्मी को सहारा दे सकेगी। चौदह वर्षीय रज्जाक को भी हौसला है कि वह कम्प्यूटर का काम करके अपने जसे दूसरे लोगों को इससे जोड़ेगा। केवल रजिया या रज्जाक नहीं प्रदेश के चार हजार बच्चों के सपनों को ऐसे ही पंख लग गये हैं। यह वह लड़के-लड़कियां हैं, जो इस बार मदरसों से केवल दीनी तालीम नहीं, बल्कि रोजगार परक व्यावसायिक प्रशिक्षण हासिल करके निकले हैं। मदरसों से व्यावसायिक प्रशिक्षण हासिल करने वाला यह पहला बैच है। दरअसल प्रदेश सरकार द्वारा मदरसों में दीनी तालीम के साथ रोजगार परक शिक्षा की भी जरुरत महसूस की गयी, लिहाजा साल 2005 में मिनी आईटीआई योजना के तहत यहां रोजगार परक व्यावसायिक प्रशिक्षण शुरू किया गया। पहले चरण में सरकार ने इसके लिए 140 मदरसों का चयन किया। इन्हीं मदरसों से रोजगार परक व्यावसायिक प्रशिक्षण की शिक्षा हासिल करके चार हजार 167 लड़के-लड़कियों का पहला समूह निकला है। अपनी इस योजना की सफलता से सरकार तो उत्साहित है ही इन बच्चों को भी आत्मबल मिल गया हैं। इस बाबत लखनऊ के रकाबगंज स्थित मदरसे के छात्र जुबैद ने कहा इस प्रशिक्षण ने अहसास दिलाया कि हममें भी कोई हुनर है। इतना ही नहीं इस शिक्षा से इन लोगों में जल्दी ही स्वरोजगार शुरू करने का भी उत्साह नजर आ रहा है। उधर उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के अध्यक्ष हाजी रिजानवुल हक भी ख्वाब को हकीकत में तब्दील होता देख बेहद खुश है। उन्होंने इसकी सफलता को देखते हुए राज्य सरकार से दो सौ अन्य मदरसों में मिनी आईटीआई योजना शुरू करने का प्रस्ताव किया है। रजिस्ट्रार शोएब अहमद बताते हैं दरअसल इन मदरसों में जो बच्चे तालीम हासिल करने आते हैं वह आर्थिक दृष्टि से कमजोर परिवारों के होते हैं। मदरसे से तालीम हासिल करने के बाद उनके पास रोजी रोटी कमाने लायक कोई जरिया नहीं होता। यही वजह है कि सरकार ने इसके लिए मिनी आईटीआई योजना की शुरुआत की जिससे यहां के दीनी तालीम हासिल किए लड़के लड़कियां भी जीविकोपार्जन के लिए अपने पैरों पर खड़े हो सकें। वह बताते हैं जिन 140 मदरसों में यह योजना शुरू की गयी है उसमें छात्रों के सामने 17 ट्रेंड चुनने का विकल्प था। इसके तहत लड़कियों ने जहां सिलाई, कढ़ाई को तवज्जो दी वहीं लड़कों ने सबसे ज्यादा कम्प्यूटर आपरेटर और प्रोग्रामिंग असिस्टेंट ट्रेंड चुना। साथ ही इलेक्ट्रीशियन, मैकेनिक, आशुलिपिक और सेक्रेटेरियल प्रैक्िटस को भी छात्र पसंद कर रहे हैं। इस योजना के अन्तर्गत चयनित मदरसों में तीन प्रशिक्षक रखे गये हैं। इन्हें चार हजार रुपये प्रतिमाह का मानदेय दिया जाता है। इस प्रशिक्षण पर आने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार अनुदान के तहत मदरसों को देती है।

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