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पेट्रो प्रोफेसनलों को तैयार करने में मिलेगी मदद

पदमावत के रचयिता महान कवि जायस की जन्मभूमि रायबरेली स्थित में स्थापित होने वाला राजीव गांधी पेट्रोलियम टेक्नोलाजी संस्थान न केवल भारतीय तेल एवं गैस उद्योग के विकास के लिए पेट्रोलियम इंजीनियरों प्रौद्योगिकीविदें तथा अन्य प्रोफेसनलों के निर्माण में सहायक होगा बल्कि यह इस क्षेत्र से जुड़ी विदेशी जरूरतों को पूरी करने में मददगार हो सकता है। उल्लेखनीय है कि कंसल्टैंट कंपनी प्राइस वाटरहाउस कूपर्स ने अभी हाल में एक सर्वेक्षण कराया था जिसके अनुसार, वर्ष 201तक भारत में प्रशिक्षित श्रमबल की उपलब्धता तथा जरूरत में अंतर लगभग 36000 तक बढ़ चुका होगा और देश में मौजूद संस्थान पेट्रोलियम क्षेत्र में टेक्िनकल श्रमबल की बढ़ती जरूरत को पूरी करने में सक्षम नहीं होंगे। इसी संदर्भ में उम्मीद है कि राजीव गांधी इंस्टीच्यूट आफ पेट्रोलियम टेक्नोलाजी इस अंतर को पाटने तथा विश्व स्तरीय टेक्िनकल मानव संसाधन के विकास में उल्लेखनीय योगदान दे पाएगा। पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र की ही तर्ज पर देश के तेल एवं गैस क्षेत्र में भी योग्य तथा कुशल प्रोफेसनलों की जरूरत है। जिस तरह आईटी क्षेत्र में कंसल्टैंट होते हैं उसी प्रकार तेल एवं गैस क्षेत्र में भी कंसल्टैंट होने चाहिए जो प्रौद्योगिकी से जुड़े हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में युवा पीढ़ी की तकनीकी क्षमता को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकें। राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान का जोर निकट भविष्य में विश्व स्तरीय शिक्षा, प्रशिक्षण तथा पेट्रोलियम और ऊर्जा उद्योग के लिए अनुसंधान उपलब्ध कराना है। संस्थान ने अन्य देशों में इसी प्रकार के शैक्षणिक संस्थानों के साथ संपर्क स्थापित किए हैं। अधिकारी ने बताया कि सरकार का जोर पूरे पेट्रोलियम एवं ऊर्जा स्पेक्ट्रम के लिए एक वैश्विक शक्ित केन्द्र बनाने पर है। इस संस्थान के निर्माण की अनुमानित लागत 435 करोड़ रुपये है जिसकी पूर्ति आंशिक रूप से 285 करोड़ रुपये के बजटीय समर्थन से तथा तेल उद्योग विकास बोर्ड से प्राप्त होने वाले 150 करोड़ रुपये से की जाएगी। इस संस्थान का एकेडेमिक संचालन 2008-0से प्रारंभ हो जाएगा। प्रारंभ में कोर रिसर्च पदों के अनुसंधान एवं विकास कैडर के लिए 17 पदों को निर्धारित किया गया है।उन्होंने बताया कि आईआईटी, आईआईएम तथा बनारस हिन्दू विश्वविद्धालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों से इस संस्थान के कैरीकलम का निर्माण किया जा रहा है। ये सारे संस्थान इस बात पर सहमत हो गए हैं कि वे आरजीआईपीटी को टीचिंग सपोर्ट देंगे।

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