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पीपीपी ने सरकार बनाने का पेश किया दावा

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने आम चुनावों के करीब एक हफ्ते बाद रविवार को औपचारिक तौर पर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। उधर अपने समर्थक दलों की पराजय से विपक्ष के हमलों से घिर चुके पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ छूटते जा रहे विकल्पों के बीच कुछ दिनों मंे ही इस्तीफा देकर स्वनिर्वासित होने का मन बना चुके हैं। वह देश की नयी निर्वाचित नेशनल असेंबली से टकराव का माद्दा छोड़ चुके हैं जिसकी बैठक अगले माह होनी निर्धारित है। हालांकि मुशर्रफ ने इसे कोरी अफवाह बताते हुए किसी निर्वासन से इनकार किया है। पीपीपी नेताआें ने सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या का गणित बैठाने के बाद कहा कि राष्ट्रपति को उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के एक वरिष्ठ नेता ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने रविवार को पीपीपी नेता आसिफ अली जरदारी से मुलाकात कर उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री और पार्टी प्रमुख नवाज शरफ का सरकार बनाने के बारे में संदेश दिया। दोनों पार्टियां पहले ही मिलकर सरकार बनाने पर सहमत हो चुकी हैं। उधर, लंदन में द संडे टेलीग्राफ ने राष्ट्रपति के विश्वस्त सूत्रों के हवाले से लिखा है ‘मुशर्रफ ने अपने निर्वासन की रणनीति के बारे में विचार-विमर्श भी शुरू कर दिया है। मैं समझता हूं कि यह केवल दिनों की बात रह गयी है, महीनों की नहीं क्योंकि वह अपने लिए सम्मानजनक निर्वासन चाहते हैं।’ एक अन्य करीबी के अनुसार मुशर्रफ महाभियोग झेलने की बजाये इस्तीफा देना पसंद करेंगे। ब्रिटिश अखबार को एक मुशर्रफ समर्थक अनाम अधिकारी ने बताया ‘उन्होंने कई सारी गलतियां की हैं, लेकिन असल में उन्होंने देश को मजबूत किया है और वह केवल अपने हित के लिए तोड़ना नहीं चाहते।’ मुशर्रफ के एक सहयोगी ने अखबार को बताया कि पाकिस्तानी राष्ट्रपति को लगता है कि इससे पहले नई संसद उनके खिलाफ कोई कदम उठाए, वह सम्मानपूर्वक रास्ते से हटने पर विचार कर सकते हैं। मुशर्रफ के एक अन्य वरिष्ठ सहयोगी ने बताया कि पाकिस्तानी राष्ट्रपति नई सरकार के साथ किसी तरह का टकराव नहीं चाहते हैं। हालांकि विपक्ष पूरी तरह दो-तिहाई बहुमत में नहीं है। अगर विपक्ष मिलकर दो-तिहाई बहुमत हासिल करता है तो इस स्थिति में मुशर्रफ खुद सम्मानपूर्वक रास्ते से हटना चाहेंगे। सूत्रों के मुताबिक चुनाव के नतीजों के बाद मुशर्रफ ने इस्तीफा देने का फैसला कर लिया था लेकिन समर्थित पीएमएल-क्यू के नेताआें ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया था। सूत्रों का यह भी कहना है कि चुनाव परिणामों के बाद पीपीपी नेता आसिफ अली जरदारी के साथ एक समझौता करने की पहल भी की गई लेकिन ऐसा नहीं हो सका। पिछले हफ्ते मुशर्रफ ने कहा था कि अपने समर्थक दलों की भारी पराजय के बावजूद वह इस्तीफा नहीं देंगे और देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दिशा-निर्देश देना जारी रखेंगे। पीपीपी, पीएमएल-एन और एएनपी के पास संसद में 211 सीटें है। विपक्षी दलों को मुशर्रफ के खिलाफ महाभियोग चलाने और उन्हें बर्खास्त करने के लिए 228 सांसदों की आवश्यकता होगी।

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