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मनसे के बयान से उत्तर भारतीय फिर खौफजदा

राज ठाकरे की बयानबाजी पर कानूनी शिकंजा कसने और सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों के खिलाफ माहौल कुछ शांत हो रहा था, लेकिन महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के एक बयान ने खौफ फिर बढ़ा दिया है। मनसे ने कहा है कि अगर उत्तर भारतीय 25 फरवरी तक महाराष्ट्र से नहीं भागे तो उन्हें जबरन भगाया जाएगा। अब तक करीब 60 हजार से ज्यादा लोग महाराष्ट्र छोड़ चुके हैं। रविवार को राज ठाकरे ने फिर कहा कि उत्तर भारतीयों का विरोध गैर-संवैधानिक नहीं है। उद्योगों में मजदूरों की कमी को देखते हुए मनसे ने मराठियों के लिए नौकरी के विज्ञापन भी निकाले हैं। राज ठाकरे भले ही आग उगल रहे हों, कई नेता ऐसे भी हैं जो यूपी-बिहार के लोगों को सांत्वना देने में जुटे हैं। इनमें नीलू फुले, मोहन धारिया, डॉक्टर बाबा आढाव और पीवी सावंत जैसे गैर-राजनीतिक मराठी लोग इस काम में जुटे हैं। इस बीच, लोजपा नेता रामविलास पासवान ने कहा है कि अगर महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों पर ज्यादती बंद नहीं की गई तो वह भी चुप नहीं बैठेंगे।ड्ढr इससे पहले, मनसे प्रवक्ता शिशिर शिंदे ने शनिवार को कहा था कि अगर महाराष्ट्र और मराठी लोगों का सम्मान नहीं किया गया तो मुंबई से 25 लाख बिहारियों को वापस भेजना पड़ेगा। राज ठाकरे बिहार के राज्यपाल गवई के बहाने दलितों को भी अपने आंदोलन में शामिल करने का माहौल तैयार कर रहे हैं। गवई महाराष्ट्र के दलित नेता हैं। उन्हें बिहार विधानसभा में अपमानित करने के मामले को दलित नेता रामदास अठावले ने भी लपक लिया है। उन्होंने गवई की अवमानना का विरोध करते हुए बिहार सरकार से अनुरोध किया है कि मराठीभाषियों को सुरक्षा प्रदान करें।ड्ढr उधर, शनिवार को बीड में शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने किसान रैली में गवई के मामले में लालू यादव को चेतावनी देते हुए कहा था कि महाराष्ट्र के लोगों को उकसाने की कोशिश न करें। हालाँकि गवई मामले पर महाराष्ट्र कांग्रेस ने भी नाराजगी जताई है। इस बीच, यहाँ के यूपी-बिहार के नेताओं ने राज के मकसद को नाकाम करने के लिए प्रतिक्रिया जाहिर करने से खुद को बचाना शुरू कर दिया है। सपा नेता अमर सिंह और लालू यादव के बयान यहाँ रह रहे यूपी-बिहार के लोगों को भी अखरने लगे हैं। उनका मानना है कि इन नेताआें की सुरक्षा के लिए पुलिस-कमांडो हैं, मगर गरीब मजदूरों को आश्वासनों के जरिए सुरक्षा की चादर दी जा रही है। नासिक में एक सुरक्षा गार्ड के मारे जाने के बाद उनके परिवार को पूछने वाला कोई नहीं है। यही लोग अब सवाल कर रहे हैं कि आखिर यूपी-बिहार के नेता अपने लोगों को यहाँ कैसे सुरक्षा देंगे।

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