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सहकारी समितियों को बकाया भुगतान का नोटिस जारी

प्रदेश भर की सहकारी आवास समितियों ने विकास शुल्क का आवास विकास परिषद का करीब 85 करोड़ रुपए अब तक अदा नहीं किया है। अब परिषद ने इस राशि को वसूलने के लिए सम्बन्धित समितियों को नोटिसें जारी किए हैं।ड्ढr प्रदेश में सहकारी आवास समितियों ने जनता को विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद की तुलना में सस्ते प्लाट दिए। जनता ने प्लाट तो ले लिए लेकिन इनके इर्द-गिर्द का क्षेत्र पूरी तौर से अविकसित रहा क्योंकि इन समितियों ने विकास शुल्क जमा ही नहीं किया और इस मद का पूरा पैसा खा गईं। नतीजतन हर बड़े शहर में अवैध अविकसित कालोनियों की भरमार हो गई। आवास विभाग के आँकड़ों के मुताबिक मौजूदा समय में सूबे में 35 से 55 प्रतिशत अविकसित कालोनियाँ हैं।ड्ढr आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने उन कालोनियों का ब्योरा निकाला है जो परिषद की योजनाआें के अंदर हैं और जिनका आंतरिक और बाहरी विकास परिषद ने किया है। परिषद ने बीते वषरे में सहकारी समितियों की कालोनियों के विकास पर 85 करोड़ रुपया खर्च किया है।ड्ढr सबसे ज्यादा लखनऊ, गाजियाबाद, कानपुर, आगरा और मेरठ पर खर्च हुआ है। उप्र आवास विकास परिषद अधिनियम की धारा 50 व 54 में बेटरमेंट फीस व असुधार शुल्क लिए जाने का प्रावधान है। लेकिन इस मद में परिषद ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। नतीजन परिषद का करीब 85 करोड़ रुपया अभी भी डूबा हुआ है। सीएजी रिपोर्ट में भी इसकी तत्काल वसूली के निर्देश की बात कही गई है।ड्ढr परिषद का जो 85 करोड़ रुपया आज भी बकाया है उनमें राजधानी लखनऊ में वृंदावन योजना में विकास शुल्क का 1.22 करोड़ रुपया, इंदिरानगर मंे असुधार शुल्क का 1.7लिए जाने का प्रस्ताव तैयार है। इसी प्रकार गाजियाबाद में 4.30 करोड़ रुपए, कानपुर में 1.87 करोड़ रुपए वसूल किए जाने हैं। विभाग के अधिकारी कहते हैं कि अगर नोटिस जारी करने के बाद भी पैसा जमा नहीं हुआ तो समितियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।ं

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