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ऑन डिमांड तैयार हो रही हैं लाह की सुंदर चूड़ियां

खादी मेले में जहां एक और देशी उद्यमिता का विहंगम नजारा देखने को मिल रहा है। वहीं झारखंड के शिल्पियों की कलाकृतियां किसी से कम नहीं हैं। चाहे वह सूप-दौरी हो या चादर-लुंगी। यहां के करीगर अपनी बेमिसाल कारीगरी का बेजोड़ नमूना पेश कर रहे हैं।ड्ढr गढ़वा के कारीगर कपिल चौधरी द्वारा सन से बनाये टॉपर, रस्सी लोगों को अपनी आेर आकर्षित कर रहे हैं। लोहरदगा के कारीगर रुस्तम रोशन द्वारा निर्मित वाल हैंगिंग, कालीन की बनावट देखकर लोग खुले कंठ से उनकी प्रशंसा कर रहे हैं। साहेबगंज की महिला कारीगर ऑन डिमांड लाह की चूड़ियां तैयार कर रही हैं। दिलचस्प तो यह है कि सिर्फ 10 मिनट में मनचाही चुड़ियां तैयार कर दी जाती है। पश्चिम सिंहभूम से आयी रीना देवी आकर्षक सूप-दौरी, चाला और डलिया बनाकर गृहणियों की मांग पूरी कर रही हैं। देवघर के कारीगरों द्वारा निर्मित सूती के बेडशीट, चादर और लुंगी लोगों को काफी भा रहे हैं। साहेबगंज की सिल्क की साड़ी, चादर और तौलिये महिलाआें के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। सिल्ली के कारीगरों द्वारा बनाये गये छऊ नृत्य के मास्क लोगों को काफी भा रहे हैं। हस्तकरघा रेशम एवं हस्तशिल्प निदेशालय के स्टॉल में तसर का कोनुम, अंडी रेशम का कीड़ा, मलवरी तितलियों के अंडे और मलवरी प्यूमा प्रदर्शित किये गये हैं। स्टॉल के संचालक शिवनारायण मंडल ने बताया कि तसर के एक कोनूम से 1200 मीटर धागा निकाला जाता है । बिरसा मुंडा पेवेलियन में महात्मा गांधी की जीवनी पर बनाये गये दुर्लभ चित्रों के साथ-साथ खान अब्दुल गफ्फार खान सहित कई स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित चित्र प्रदर्शित किये गये हैं। हजारीबाग के कारीगराों द्वारा बनाये गये मिट्टी के खिलौने हर किसी का ध्यान खींच रहे हैं। इसके अलावा खूंटी, देवघर, बोकारो, जामताड़ा, सरायकेला, गुमला सहित अन्य जिलों के कारीगरों ने अपनी कलाकृतियों का प्रदर्शन यहां किया है।

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