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जीता तो पार, हारा तो फंसा भारत

भारत को त्रिकोणीय क्रिकेट सीरीज के फाइनल में सीट पक्की करने के लिए अंतिम मैच में जीत की जरूरत है। मंगलवार को श्रीलंका के खिलाफ ‘करो या मरो’ वाले इस मैच में भारत की तनाव से निपटने की भी परीक्षा होगी। भारतीय टीम टूर्नामेंट में अभी तक आवश्यक कंसिसटेंसी नहीं दिखा पायी है। लेकिन बेस्ट ऑफ थ्री फाइनल्स में क्वालीफाई करने के लिए उसके पास श्रीलंका को हराने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। अगर भारत हार जाता है तो भी उसके पास फाइनल में खेलने का मौका होगा। उसके लिए जरूरी है कि श्रीलंका अंतिम लीग मैच में ऑस्ट्रेलिया से हार जाए। लेकिन भारतीय खिलाड़ी तब तक इंतजार नहीं करना चाहते। भारत के लिए इस अगर मगर के चक्कर में फंसने की अपेक्षा यह बेहतर होगा कि वह सीधी जीत दर्ज करे और फाइनल में पहुंचे। महेंद्र सिंह धोनी और उनकी युवा ब्रिगेड के लिए यह काम आसान नहीं होगा। श्रीलंकाई टीम भी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहेगी। इसलिए एशियाई टीमों के बीच यह मुकाबला काफी रोमांचक होने की उम्मीद है। भारत को फाइनल के लिए केवल एक जीत की जरूरत है। पर श्रीलंका का काम थोड़ा मुश्किल है। उसे खिताबी मुकाबले के लिए बाकी बचे दोनों मैच जीतने होंगे। ऑस्ट्रेलिया पहले ही सात मैचों से 26 अंक लेकर क्वालीफाई कर चुका है। भारत छह मैचों से बारह अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है। श्रीलंका के छह मैचों से छह अंक हैं। भारत के अब तक फ्लॉप चल रहे शीर्ष क्रम के सितारे बल्लेबाजों को इस निर्णायक मैच में अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप प्रदर्शन करना होगा। धोनी रविवार को सिडनी में ऑस्ट्रेलिया से मैच हारने के बाद अपने शीर्ष बल्लेबाजों पर बरसे थे। उन्होंने सचिन तेंदुलकर और वीरेन्द्र सहवाग के लिए कहा था कि बिना शीर्ष क्रम के चले आप मैच नहीं जीत सकते हैं। सचिन, सहवाग और युवराज तीनों का इस सीरीज में प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। श्रीलंका के खिलाफ मैच में भले ही युवराज ने मैच जिताऊ पारी खेली। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वह एक बार फिर असफल रहे। मास्टर ब्लास्टर सचिन का बल्ला भी इस पूरी सीरीज में खामोश ही रहा है। वह अपने नाम के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। शायद उनकी लगातार असफलता के कारण निराश धोनी ने यह टिप्पणी की है। सहवाग को पिछले दो मैचों में खेलने का मौका नहीं दिया गया। लेकिन जब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वह सिडनी में खेलने उतरे तो अच्छी शुरुआत के बावजूद वह बड़ा स्कोर बनाने में असफल रहे। सिडनी में भारतीय गेंदबाजों का प्रदर्शन भी अच्छा नहीं रहा। गेंदबाजों ने शॉर्ट पिच गेंद डालकर भरपूर रन लुटाए। अब अगर इस महत्वपूर्ण मैच में भारतीय गेंदबाजों ने अनुशासित गेंदबाजी नहीं की तो इसका खामियाजा टीम इंडिया को भुगतना पड़ सकता है। इस पूरी सीरीज में भारत की आेपनिंग साझेदारी कभी भी अच्छी नहीं हुई है। पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली की अनुपस्थिति में ऐसा लगता है मानो सचिन के बल्ले में जंग लग गई हो। वनडे मैचों में गांगुली के साथ 21 शतकीय साझेदारी का रिकार्ड बनाने वाले सचिन का बल्ला खामोश है। धोनी के निशाना साधने के बाद सचिन, सहवाग और युवराज शानदार प्रदर्शन करने को आतुर होंगे। खासतौर पर सचिन क्योंकि वह इस तरह के शब्दबाणों का जवाब अपने बल्ले से देते हैं।ड्ढr उधर श्रीलंकाई टीम की हालत भी भारत से यादा इतर नहीं है। उसके शीर्ष बल्लेबाज भी इस पूरे टूर्नामेंट के दौरान असफल ही रहे हैं। सनत जयसूर्या का बल्ला नहीं चल रहा है। कप्तान माहेला जयवर्धने, चमारा सिल्वा, तिलकरत्ने दिलशान का बल्ला भी कुछ खास करामात नहीं कर सका है। श्रीलंकाई बल्लेबाजी का आलम यह रहा है कि उसने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कम स्कोर वाले मैच भी बोनस अंकों के साथ गंवा दिए हैं। लिहाजा भारत के खिलाफ करो या मरो मुकाबले में उनके बल्लेबाजों को प्रतिबद्धता तो दिखानी होगी। क्योंकि यह मैच अगर वे हार गए तो फाइनल की रेस से बाहर हो जाएंगे। श्रीलंका के पक्ष में एक चीज जाती है वह है उनकी गेंदबाजी। पूरी सीरीज के दौरान उनके गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया है। खासतौर पर लसिथ मलिंगा, ए. अमरसिंघे और फारवेज महरूफ ने। भारत को गेंदबाजों की इस तिकड़ी से सावधान रहना होगा। लिहाजा भारतीय समयानुसार तड़के होने वाले इस जबर्दस्त मुकाबले में दोनों टीमों के बल्लेबाजों की अग्निपरीक्षा होनी तो तय है। एक और असफलता किसी भी बल्लेबाज का भविष्य बिगाड़ सकती है।

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