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पीलीभीत : ‘वरुण राग’ नहीं, विकास है मुद्दा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के युवा नेता वरुण गांधी के अल्पसंख्यक विरोधी बयान के कारण सुर्खियों में छाए रहने वाले पीलीभीत संसदीय क्षेत्र की जनता के लिए मजहब नहीं, बल्कि विकास है प्रमुख मुद्दा। मतदाताआें को इससे लेना-देना नहीं है कि किस उम्मीदवार ने क्या कहा, असली सवाल यह है कि कौन इस क्षेत्र का विकास करेगा। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उन्होंने विकास के वादे को ध्यान में रखकर ही मेनका गांधी को पांच बार पीलीभीत से जिताया। पीलीभीत व्यापार मंडल के प्रमुख निजामुद्दीन अंसारी कहते हैं, ‘‘मेनका ने हमसे वादा किया था कि यहां बड़ी लाइन बिछाई जाएगी और सड़कों की दशा सुधारी जाएगी, पर ऐसा नहीं हुआ। हम भावना में बहकर वोट नहीं देंगे। हमारे लिए विकास मुद्दा है।’’ क्षेत्र के उदयकरनपुर गांव के राजकुमार लोध कहते हैं, ‘‘मैं पढ़ा-लिखा हूं, पर रिक्शा खींचता हूं। आखिर मुझे नेताआें से क्या मिला? वोट उसे ही मिलेगा जो हमें रोजगार देगा और क्षेत्र का विकास करेगा।’’ गन्ने की खेती के लिए विख्यात इस इलाके की सड़कों की जर्जर हालत विकास के वादों के खोखलेपन को पुष्ट करती है। एक साइकिल दुकान के मालिक आनंद लोध कहते हैं, ‘‘हरिद्वार रोड, स्टेशन रोड और ज़े पी. रोड को छोड़कर आप यहां की किसी भी सड़क पर एक किलोमीटर भी सुरक्षित तरीके से गाड़ी नहीं चला सकते।’’ यहां से समाजवादी पार्टी (सपा) उम्मीदवार रियाज अहमद और कांग्रेस उम्मीदवार बी़ एम. सिंह भी मानते हैं कि असली मुद्दा विकास है। दोनों मेनका पर क्षेत्र के लिए कुछ भी नहीं करने का आरोप लगाते हैं।

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  • Web Title: पीलीभीत : ‘वरुण राग’ नहीं, विकास है मुद्दा