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विप में सदस्यों ने सरकार को घेरा

विधानपरिषद में सोमवार को सरकार अपने ही उत्तर को ले कटघरे में खड़ी हो गई। राज्य के 26 विद्यालयों के 26 उर्दू शिक्षकों की सेवा को ले विधान परिषद में जमकर वाद-विवाद हुआ और सदस्यों ने एक सुर में सरकार को घेरा। यहां तक कि सभापति प्रो. अरुण कुमार ने भी कहा कि इस मामले में राज्य में गलत संदेश गया है। शिक्षा मंत्री वृशिण पटेल ने बताया कि उर्दू शिक्षकों का मामला प्रक्रियाधीन है, ऐसे में इस मामले में तत्काल कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मानक मंडल के अंतर्गत उर्दू विषय नहीं होने के कारण यह परेशानी उत्पन्न हुई है। सदस्यों ने शिक्षा मंत्री के उत्तर का जमकर विरोध किया और सरकार पर नाहक विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया। सदस्यों ने नौकरशाही पर इस मामले में सरकार को दिग्भ्रमित करने का भी आरोप लगाया।ड्ढr ड्ढr उधर सभापति ने शिक्षा मंत्री के जवाब से असहमति जताते हुए दो सरकारी पत्रों का उल्लेख कर बताया कि उक्त पत्र में उर्दू के बतौर विषय मानक मंडल के अंतर्गत होने का जिक्र है। सभापति के हस्तक्षेप के बाद शिक्षा मंत्री ने इसकी जांच का भरोसा दिलाया। हालांकि वे सदस्यों के सवालों के बौछार से काफी परेशान भी दिखे। राजद के नवल किशोर यादव ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से वर्ष 1ोटि के प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय का मामला उठाया था। उनके अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बावजूद 25 वर्षो से कार्यरत 26 विद्यालयों के उर्दू शिक्षकों को छोड़कर अन्य सभी विद्यालयों के शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है। इससे उर्दू शिक्षकों में भारी रोष है। शिक्षा मंत्री ने जैसे ही मानक मंडल का हवाला दिया, सदस्य एकदम से भड़क पड़े और सरकार पर गलतबयानी का आरोप लगाना शुरू कर दिया। एकसाथ कई सदस्य खड़े हो गए।ड्ढr ड्ढr केदार पांडेय ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय हो चुका है, ऐसे में सरकार अपने दायित्व से भाग नहीं सकती। तनवीर हसन ने सरकार पर उर्दू विरोधी होने का आरोप लगाया। बासुदेव सिंह, चंदन बागची, नागेन्द्र सिंह, दिलीप चौधरी, गुलाम गौस, नवल यादव, मुंद्रिका सिंह यादव, भीम सिंह ने भी कहा कि सब कुछ स्पष्ट होने के बावजूद मंत्री मामले को उलझा रहे हैं। कई सदस्यों ने सभापति से खुद इस मामले की संचिका मंगाकर मामले का निपटारा करने का अनुरोध किया। सदस्यों के लगातार प्रहार से परेशान मंत्री ने भी सभापति से संचिका मंगाने का अनुरोध किया। मंत्री के अनुरोध का सदस्यों ने मेज थपथपाकर स्वागत किया।ड्ढr ड्ढr आधी आबादी को सशक्त बनाने की कई योजनाएंड्ढr पटना(हि. ब्यू.)। राज्यपाल के अभिभाषण का वाद- विवाद के दौरान सोमवार को विधान परिषद में सत्ता पक्ष के सदस्यों ने समर्थन किया तो कतिपय निर्दलीय सदस्यों ने पुरजोर विरोध किया। बहस की शुरुआत करते हुए भाजपा की श्रीमती किरण घई सिन्हा ने कहा कि राज्यपाल महोदय ने अपने अभिभाषण में बिहार के बदले वातावरण की चर्चा की है। जनता के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों को उन्होंने रेखांकित किया है और सरकार द्वारा तीसरी बार पूर्ण बजट पेश किये जाने की सराहना की है। श्रीमती सिन्हा ने अभिभाषण में शामिल सरकारी कार्यक्रमों की चर्चा करते हुए कहा कि सरकार ने आधी आबादी को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं दी हैं। राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यापक सुधार हुआ है, पुलिस संवेदनशील हुई है। सरकार ने विकास को एजेन्डा बनाकर इस मामले में देश भर में 1वें पायदान पर खड़े इस राज्य को अगली कतार में लाने की कोशिश की है।ड्ढr ड्ढr जद यू के सदस्य असलम आजाद ने अभिभाषण की चर्चा करते हुए कहा है कि सरकार बिहार की छवि दंगामुक्त राज्य के रूप में उभारने में सफल हुई है तो अल्पसंख्यकों का विश्वास भी जीतने में कामयाब हुई है। राज्य में 11 हजार से अधिक उर्दू शिक्षकों की बहाली हुई है। कब्रिस्तानों की पैमाइश करा कर घेराबंदी कराने का काम जारी है।निर्दलीय सदस्य दिलीप कुमार यादव ने पंचायत प्रतिनिधियों के लिए वेतन निर्धारण की चर्चा अभिभाषण में नहीं होने पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने वित्तरहित शिक्षा नीति को समाप्त कर कालेजों को वित्तसहित करने की आवश्यकता जतायी। जिलों में छात्राआें के लिए छात्रावास की कमी पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार बंद पड़े छात्रावासों को भी नहीं खुलवा सकी है। निर्दलीय सदस्य बलराम सिंह यादव ने पंचायती राज अधिनियम 2006 को नाकाफी बताते हुए कहा कि सरकार अब तक स्थानीय निकायों को स्थानीय स्वशासन का रूप नहीं दे सकी है। पंचायत प्रतिनिधियों के लिए वेतन- भत्ता का प्रावधान तो नहीं ही किया गया कई अधिकारों में भी कटौती की गई।ं

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