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जेल में कैदी भी होंगे हाईटेक

जेलों में वीडियो कांफ्रेंसिंग से सिर्फ कैदियों से जुड़े मामलों की सुनवाई ही नहीं पढ़ाई भी होगी। बड़े-बड़े प्रोफेसर बंदियों को पढ़ाएंगे। पढ़ाई के साथ साथ उन्हें कम्प्यूटर ट्रेनिंग भी जाएगी। इतना ही नहीं कैदी अपनी इच्छा के अनुसार कॉरेस्पॉन्डेंस कोर्स के जरिए डिग्रियां भी हासिल कर सकेंगे। राजभवन ने सलाखों में बंद बंदियों के लिए यह अनूठी पहल की है। इसके लिए जेल प्रशासन और विश्वविद्यालयों के सहयोग से जल्द ही कई तरह के कोर्स और वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे। राजभवन जेल प्रशासन के संपर्क में है। जल्द ही राजभवन की पहल पर एक टीम बिहार की विभिन्न जेलों का दौरा कर कैदियों की रुचि जानेगी और उसी के मुताबिक ट्रेनिंग प्रोग्राम की रूपरेखा भी तय होगी। इस सिलसिले में राज्यपाल के विशेष कार्य पदाधिकारी डॉ.कृष्ण कुमार और जेल आईजी संदपी पौंडरीक के बीच बातचीत हो चुकी है।ड्ढr ड्ढr राजभवन ने जेल प्रशासन के समक्ष विभिन्न ट्रेडों में वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम और पढ़े लिखे बंदियों के लिए कॉरेस्पॉन्डेंस कोर्स का प्रस्ताव रखा है। वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोगाम में कम पढ़े-लिखे बंदियों को स्कूटर मैकेनिक और बिजली मिस्त्री की ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग तीन-चार महीनों की होगी और इसके लिए आर्थिक सहायता राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा पढ़े लिखे बंदियों को कम्प्यूटर चलाने और टाइपिंग की ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही वैसे बंदी जो आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं उनके लिए कॉरेस्पॉन्डेंस कोर्स की सुविधा होगी। राज्य की सभी जेलों में अगले छह महीनों में वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा होगी। इसके जरिए विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक कैदियों को टीवी स्क्रीन पर ही लेक्चर देंगे। कैदियों के लिए विभिन्न कार्यक्रमों को विश्वविद्यालयों के विभिन्न विभागों की मदद से तैयार कर संचालित किया जाएगा। राजभवन की टीम मार्च के प्रथम सप्ताह में जेलों का दौरा करेगी और फिर कार्यक्रमों से संबंधित प्रस्ताव तैयार कर जेल प्रशासन को सौंपेगी।

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