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३० स्थलों को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की कवायद

उत्तर बिहार के लगभग तीस पुरातात्विक महत्व के स्थलों के दिन फिरेंगे। इन स्थलों को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की कवायद शुरू हो गयी है। इस बाबत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने सर्वे शुरू कर दिया है। राजनगर के महाराजा पैलेस व उसके आसपास के क्षेत्रों में सर्वे के बाद प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।ड्ढr ड्ढr भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ,पटना के अधीक्षक पुरातत्व डा.पीके मिश्रा ने इन पुरातत्व महत्व के स्थलों का सर्वे करने के बाद सोमवार को बताया कि राजनगर के संबंध में एएसआई की महानिदेशक से बात हो गयी है। उनके अनुसार मिथिलांचल स्थित उच्चठ, भगवानपुर, अहिल्यास्थान, कल्याणेश्वर कलना, डोकहर,पैठन, अंधरा ठाड़ी, बिस्फी, मंगरौनी एकादश रूद्र शिव मंदिर, कोईलख मंदिर, बलिराजगढ़, महिषी व अमौर आदि को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने के लिए जल्द ही केन्द्र के पास प्रस्ताव भेजा जाएगा। सरकारी संरक्षण के अभाव में ये अनमोल धरोहरें खंडहर में तब्दील हो रहे हैं।ड्ढr ड्ढr उनके अनुसार राजनगर का महाराजा पैलेस लगभग 322 एकड़ में फैला है। पैलेस में काली मंदिर है जो कि डेढ़ -दो सौ वर्ष पुराना है। यह तंत्र साधना का स्थल रहा है। मंदिर में बुद्ध व छिनमस्तका देवी की मूर्तियां हैं। पंचायतन स्टाइल में बने मंदिर के ऊपर में स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। पैलेस का आ*++++++++++++++++++++++++++++र्*टेक्ट इटैलियन स्टाइल का है। जर्मनी के आ*++++++++++++++++++++++++++++र्*टेक्टों ने इसे तैयार किया था। नौलखा मंदिर के चारों तरफ का गेट नक्काशीदार है।ड्ढr ड्ढr मंगरौनी एकादश रूद्र शिवमंदिर में शिवलिंग पर पिछले कई सालों के दौरान सूर्य, दुर्गा,हनुमान आदि की आकृति उभरने लगी है जिसे पुरी के शंकराचार्य ने पिछले दिनों देखा तो हतप्रभ हो गए। उच्चठ स्थित कालीडीह महाकवि कालीदास के जन्मस्थल के रूप में सुर्खियों में आया है लेकिन इसकी स्थिति दयनीय बनी हुई है। बिस्फी महाकवि विद्यापति की जन्मस्थली है पर अबतक उपेक्षित ही है। मौर्यकालीन सिंह तोरणद्वार पर एएसआई सेमिनार कराएगाड्ढr पटना (का.सं.)। कलेक्िट्रएट घाट पर मिले मौर्यकालीन सिंह तोरणद्वार पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण(एएसआई),पटना स*++++++++++++++++++++++++++++र्*ल सेमिनार कराएगा। इसके मिलने से प्राचीन पाटलिपुत्र के इतिहास पर एक नई रोशनी मिलने की उम्मीद है। इसी आलोक में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को विभाग द्वारा पत्र लिखकर सेमिनार आयोजित करने की इजाजत मांगी गयी है। सेमिनार में सूबे समेत देश के चर्चित पुरातत्ववेताओं को आमंत्रित किया जाएगा। एएसआई पटना के अधीक्षक पुरातत्व डा. फणीकांत मिश्रा ने बताया कि सेमिनार के जरिए इस बात पर रोशनी डाली जाएगी कि सिंह तोरणद्वार मौर्यकालीन है या पूर्व मौर्यकालीन। उनकी मानें तो सिंह तोरणद्वार के मिलने से पटना में रॉयल पैलेस के होने का पुरातात्विक प्रमाण मिल गया है। विभाग को भरोसा है कि शहर के उत्तरी क्षेत्र में इस रॉयल पैलेस के पुरावशेष मिल सकते हैं। एएसआई द्वारा कलेक्िट्रएट घाट के आसपास सर्वे कराया जा रहा है। लगभग पचास किलो का सिंह तोरणद्वार वैशाली में मिले कोल्हुआ पिलर से भी पुराना बताया जाता है।

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