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बचकाने आरटीआई आवेदनों से परेशान मानवाधिकार आयोग

र्मचारियों की कमी और काम के अत्याधिक बोझ से जूझ रहे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के लिए सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत दाखिल किए गए गैर-जरूरी और बचकाने आवेदन मुसीबत का सबब बन रहे हैं। औसतन एनएचआरसी के 300 कर्मचारियों को प्रति दिन 20 से 30 आवेदन प्राप्त होते हैं। एनएचआरसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ‘रोजाना मिलने वाले आवेदनों की संख्या बेहद ज्यादा है। इनमें से 70 फीसदी आवेदन आयोग की कार्यप्रणाली के बारे में होती हैं। सूचना के अधिकार के मामलों के लिए हमारे पास अलग से कोई विभाग नहीं है, फिर भी हमारे पास हम पूरी कोशिश करते हैं कि ज्यादा से ज्यादा आवेदनों का निपटारा किया जाए।’ दूसरे अधिकारी के अनुसार, ‘ज्यादातर आवेदन गैर-जरूरी और बचकाने होते हैं जिनसे बेवजह आयोग पर काम का बोझ बढ़ता है। उत्तर प्रदेश के किसी गांव से आए आवेदन में एक लड़की ने रक्षाबंधन पर अमेरिकी राष्ट्रपति बुश के लिए भेजे गए गए लड्डुआें के उनतक न पहुंचने पर मानवाधिकार के हनन की गुहार लगाई।’ अधिकारियों के अनुसार बहुत से लोग इस तरह की जानकारियों के लिए आवेदन करते हैं जो आयोग की पुस्तकों और वेबसाइट पर आसानी से उपलब्ध हैं। अधिकारियों के अनुसार इन्हें इकट्ठा कर आवेदनों का जवाब देना भी समय की बर्बादी है।

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  • Web Title: बचकानेआवेदनों से परेशान मानवाधिकार आयोग