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प्रधानमंत्री के नाम एक खुला खत

युवा नेताओं से अपेक्षाएं देश का पुराना नेतृत्व अब कुल मिला कर आज की समस्याओं को समझने और सुलझाने में असमर्थ दिखाई दे रहा है। जिस देश में 25-30 करोड़ जनसंख्या युवा वर्ग की हो, वहां जरूरी है कि नए विचारों को लेकर युवा पीढ़ी आगे आए और देश को एक नई दिशा और दशा दे। युवा नेताओं को चाहिए कि अपनी चुनावी सभाओं में रंग-बिरंगे वायदों की बजाए, यह गीत बजवाएं- सुनो न लोगों राग पुराना, मिल कर छेड़ो नया तराना, भारत की हमें तकदीर बदलनी है। आओ हम मिटा दें ‘राम-रहमान-सतनाम’ के आपसी भरम को, रहने को तो यही है हिन्दोस्तान हमारा। डॉ. आर. के. मल्होत्रा, अलकनंदा, नई दिल्ली उचित निर्णय आईपीएल को देश के बाहर आयोजित कराने का निर्णय स्वागत योग्य है। चुनाव के कारण आईपीएल भारत में कराने का जोखिम नहीं लिया जा सकता था, क्योंकि तब सुरक्षा को चुनावों और आईपीएल के बीच बांटना पड़ता जो खिलाड़ियों पर भारी भी पड़ सकता था। चूंकि मैच भारतीय समयानुसार होंगे, अत: टीवी पर मैच देखने वालों की संख्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। विदेशों में मैच होने से भले भारतीय दर्शक थोड़े उदास जरूर होंगे, पर इससे विदेशी क्रिकेट प्रेमियों को भी सचिन तेंदुलकर और एडम गिलक्रिस्ट जसे खिलाड़ी को टी-20 खेलते देखने को मिलेगा। गोपाम्बुज सिंह राठौड़, मुखर्जी नगर, दिल्ली आखिर किससे हो भय? लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के ‘जय हो’ प्रचार गीत के जवाब में भाजपा ने ‘भय हो’ प्रचार गीत निकाला है। आखिर भय किससे हो? क्या उनसे जो राम के नाम पर जनभावनाओं से खेलते आ रहे हैं। या उनसे जो मुफ्त में चावल बांटकर प्रदेश का बंटाधार करने पर तुले हुए हैं। यह हास्यास्पद ही है कि बीजेपी स्वयं ही भ्रष्ट जनों की पार्टी कहलवाने पर आमादा है। विजय लोढ़ा, रायपुर, छत्तीसगढ़ वजहड्ढr ना कोईड्ढr गुल खिलाड्ढr ना ही चमत्कार।ड्ढr वजहड्ढr उनका करवाचौथड्ढr हमारा सूर्य नमस्कार।। शरद जायसवाल, कटनी, मध्य प्रदेश

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