DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

ढिबरी ले बिजली ढूंढ़ रही राज्य की जनता

राज्य में बिजली आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गयी है। लोग त्राहि-त्राहि कर रहे। गांवों की हालत तो और भी खराब है। यहां ढिबरी के लिए केरोसिन क नहीं मिल रहा, लोग अंधेरे में हैं। खेती-बारी का काम बाधित है। मई 2007 में तेनुघाट विद्युत निगम की एक यूनिट बंद होने के बाद से ही लगातार यही स्थिति बनी हुई है।ड्ढr बिजली बोर्ड के चेयरमैन नप गये, बिजली की हालत जस की तस रही। 21 फरवरी से यहां की दूसरी इकाई बंद होने के बाद स्थिति और नाजुक है। राजधानी ही नहीं जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो जैसे बड़े शहरों में भी आठ से 10 घंटे और ग्रामीण इलाकों में 17 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित हो रही है। डीवीसी कमांड एरिया (हजारीबाग, रामगढ़ व चतरा) को छोड़ राज्य में बिजली की मांग 765 मेगावाट है। 21 फरवरी से पहले राज्य में 185 मेगावाट बिजली की कमी थी। टीवीएनएल से उत्पादन बंद होते ही यह कमी बढ़कर 400 मेगावाट हो गयी। डीवीसी से 150 मेगावाट अतिरिक्त बिजली लेने के बावजूद बिजली आपूर्ति व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। इससे स्थिति और भयावह हो गयी। राजधानी और इसके आस-पास के इलाकों में भी आठ घंटे से अधिक समय तक बिजली की लोड शेडिंग की गयी। जेनरेटर-इनवर्टर के बीच रहनेवाले सांसद और विधायकों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा। विपक्ष ने एक बार आवाज तक नहीं उठायी। सरकार और अफसरों के मुंह पर ताले पड़े रहे। जमशेदपुर शहर को गम्हरिया-गोलमुरी ग्रिड से बिजली की आपूर्ति की जाती है। गोलमुरी से अभी 35 की जगह शहर को मात्र 10-12 मेगावाट बिजली ही मिल रही। गम्हरिया से सिर्फ 40 मेगावाट बिजली मिल रही। उद्यमी त्राहि-त्राहि कर रहे। गुमला में पिछले एक सप्ताह के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां औसतन दिन भर में सिर्फ तीन घंटे बिजली रह रही है। लोहरदगा में चार घंटे बिजली की आपूर्ति हो पा रही है। सिमडेगा जिले में भी अनियिमित बिजली आपूर्ति का लोग दंश झेल रहे हैं। यहां भी औसतन 10-12 घंटे ही बिजली मिलती है। पलामू प्रमंडल के मेदिनीनगर में छह से आठ घंटे, गढ़वा में औसतन 10 घंटे और किसी दिन तो मात्र चंद घंटे ही बिजली रही और लातेहार में बिजली आपूर्ति औसतन चार से पांच घंटे रही। संथालपरगना में भी बिजली आपूर्ति की स्थिति चिंताजनक है। दुमका को 15 की जगह तीन मेगावाट बिजली ही मिल रही। गोड्डा को आठ की जगह 2 या 3 मेगावाट, देवघर को 40 की जगह 15 मेगावाट और साहिबगंज को आठ मेगावाट की जगह दो या तीन मेगावाट की ही आपूर्ति हो रही है। घंटों लोड शेडिंग के कारण लोग काफी परेशानी में हैं। पाकुड़ को कुछ राहत है। बंगाल के धूलियान से ठीकठाक बिजली मिल जा रही।ड्ढr पलामू प्रमंडल की हालत सबसे खराब, संथाल परगना भी बेहालमिल रही बिजली का लेखा-जोखा दिनगुमला लोहरदगामेदिनीनगरगढ़वाड्ढr 21 फरवरी2 घंटे 3 घंटे6.33 घंटे----------------------ड्ढr 22 फरवरी4 घंटे6 घंटे16.52 घंटे12 घंटे तक लाइन बंदड्ढr 23 फरवरी5 घंटे 7 घंटे8.18 घंटे13 घंटे तक लाइन बंद24 फरवरी4 घंटे6 घंटेघंटेघंटे तक बिजली बंदड्ढr 25 फरवरी6 घंटे 7.27 घंटे 08 घंटे7 घंटे तक बिजली बंदड्ढr 26 फरवरी5 घंट8 घंटे1.37 घंटेकुछ घंटे के लिए

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: ढिबरी ले बिजली ढूंढ़ रही राज्य की जनता