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अमेरिका से पूछा क्या?

मुशर्रफ साहब के एक कारकून ने आकर खबर दी। अच्छा, वैसे तो मैं मोहतरमा से भी मिल लेता था, जरदारी साहब से मिल ही लूंगा। पर अमेरिका से पूछा क्या- मुशर्रफ साहब ने कहा। जी, ऐसा लगता है कि उन्होंने ही भेजा होगा- कारकून ने कहा। वैसे तो मैंने उनके खिलाफ जांच फिर से खुलवा दी है। हो सकता है इसलिए भी मिलने आए हों। फिर भी एक बार अमेरिका से पूछ लो- मुशर्रफ साहब ने कहा। जनाब, जरदारी साहब और नवाज शरीफ साहब की पार्टी मिलकर सरकार बनाने वाले हैं- मुशर्रफ साहब के जासूस ने उन्हें खबर दी। ऐसा कैसे हो सकता है?-मुशर्रफ साहब ने पूछा- उन्होंने अमेरिका से पूछा क्या? जी, जरदारी साहब अमेरिकी राजदूत पैटरसन साहब से मिले तो थे- जासूस ने कहा। मुशर्रफ साहब को विश्वास नहीं हुआ- उनसे कहो कि अमेरिका से एक बार फिर पूछ लें। जनाब, जरदारी साहब और नवाज शरीफ साहब मिलकर प्रेस कांफ्रेंस करनेवाले हैं- मुशर्रफ साहब के जासूस ने आकर खबर दी। ऐसा कैसे हो सकता है? -मुशर्रफ साहब नाराज होकर बोले -उन्होंने अमेरिका से पूछा क्या? जी, लगता तो है कि पूछा ही होगा, इसीलिए तो एक साथ प्रेस कांफ्रेंस करने में इतने दिन लगा दिए। तो तुम लोग क्या कर रहे हो-मुशर्रफ साहब नाराज हो गए- पता लसहीगाआे कि उन्होंने अमेरिका से पूछा क्या? जनाब, नवाज शरीफ साहब आप के खिलाफ महाभियोग चलाना चाहते हैं- मुशर्रफ के एक सहयोगी ने कहा। उन्होंने अमेरिका से पूछा क्या? -मुशर्रफ का फिर वही प्रश्न। फिर कुछ सोचकर बोले- मैंने तो तख्तापलट के बाद उनकी जान बख्श दी थी। वरना मैं भी वही कर सकता था, जो जिया-उल-हक ने भुट्टो साहब के साथ किया था। जनाब, एहसान किया था या अमेरिका ने कहा था -सहयोगी ने पूछ लिया। खैर, छोड़ो उसे -मशर्रफ साहब ने कहा- मैंने उन्हें बख्शा तो क्या वो मुझे नहीं बख्शेंगे। पर उन्होंने अमेरिका से पूछा क्या? जनाब, प्रेस में खबर है कि आप बोरिया-बिस्तर बांध रहे हैं-मुशर्रफ साहब का एक सहयोगी बदहवास उनके पास पहुंचा। अच्छा-मुशर्रफ साहब को यकीन नहीं हुआ- पर अमेरिका से पूछा क्या? पर जनाब- सहयोगी ने कहा-यह तो आप ही बता सकते हैं। अच्छा- मुशर्रफ साहब ने कहा-अमेरिका नहीं बता सकता क्या?

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