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उत्पादन और उम्मीद

शेयर बाजार के ऊपर चढ़ने की सुखद स्थितियों के बीच औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का शून्य से 2.3 फीसदी नीचे चला जाना यह बताता है कि अर्थव्यवस्था को मंदी के असर से उबारने के लिए अभी काफी कुछ किया जाना है। इससे लगता है कि सरकार ने अब तक जितने वित्तीय राहत पैकेाों की घोषणाएं की हैं, उनसे हमार उद्योग जगत में उत्साह का संचार नहीं हो सका और उनके भीतर पैठी हुई निराशा अभी निकलने का नाम नहीं ले रही है। सबसे बुरी स्थिति मैनुफैक्चरिंग उद्योग की रही, जहां पर 3.3 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई । जाहिर है जिस क्षेत्र पर औद्योगिक उत्पादन के 80 फीसदी हिस्से का दारोमदार हो, उसके इतना नीचे गिरने के बाद उद्योग जगत की सेहत तो गिरनी ही थी। इसमें सबसे बुरी स्थिति खाद्य उत्पादों, चमड़ा और खनन क्षेत्र के लिए रही है। अगर खाद्य उत्पाद क्षेत्र की वृद्धि दर में आई करीब 36 फीसदी की कमी चिंता में डालने वाली है, तो कम समय में उपभोग में आने वाली वस्तुओं और ट्रांसपोर्ट मशीनों के उपकरणों के उत्पादन बढ़ने के आंकड़े उम्मीद भी जगाते हैं। कई क्षेत्रों में उत्पादन घटने के पीछे निर्यात में आई कमी और घरलू मांग घटने को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है तो कुछ क्षेत्रों में उत्पादन वृद्धि के पीछे केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किए जाने को श्रेय दिया जा रहा है। लेकिन पिछले 16 सालों में आई सबसे बड़ी औद्योगिक गिरावट इतना सदमा पहुंचाने वाली है कि निजी क्षेत्र के कई अर्थशास्त्री इसकी विश्वसनीयता पर ही संदेह कर रहे हैं। केंद्रीय सांख्यिकी संगठन के यह आंकड़े मार्च 200े हैं और जब इसे अप्रैल के आंकड़ों से मिलाकर ताजा गणना की जाएगी तो पहले के सालों की तरह इसके ऊपर उठने की संभावना बनी हुई है। फिर भी अगर निजी क्षेत्र के बड़े औद्योगिक प्रबंधकों और अर्थशास्त्रियों में इन आंकड़ों पर संदेह और औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक स्थिति इससे कहीं बेहतर होने का विश्वास बना हुआ है तो यह भविष्य के लिए एक मजबूत आशावादी आधार है। क्योंकि संकट से निकलने का रास्ता सिर्फ ठोस जमीनी हकीकत से ही नहीं, बल्कि उस सकारात्मक मनोविज्ञान से भी निकलता है जो विपरीत परिस्थितियों को भी अनुकूल बनाने की क्षमता रखता हो। इसीलिए चुनाव के बाद राजनीतिक दलों को संकीर्णता की भूलभुलैया से निकल कर एसी समर्थ और स्थिर सरकार का गठन करना चाहिए जो प्राथमिकता के आधार पर बजट और आर्थिक उपायों से औद्योगिक क्षेत्र की इस गिरावट को ऊपर उठा दे।

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