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गरीब की बेटी का एक्स-रे और कद्दावर लोग

ट्रॉमा सेण्टर के एक्स-रे रूम में किशोरी की इज्जत लूटने की कोशिश हुई। निजी सेण्टर के अयोग्य कर्मचारी ने ऐसा किया। वह जेल गया और बात खत्म। जिस संस्था ने इसे काम पर रखा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई से चिविवि के कार्यवाहक कुलपति डॉ. एसके अग्रवाल सहमत नहीं हैं। घटना के दिन उनका तर्क था-संस्था को चेतावनी दी गई है। आगे ऐसा हुआ तो ठेका रद कर दिया जाएगा। अगले दिन कुलपति ने कहा-अभी कार्रवाई न्यायोचित नहीं होगी। यदि मैं पूर्णकालिक कुलपति बना तो जरूर ऐसी व्यवस्था करूँगा कि चिविवि से निजी संस्थाआें को बाहर कर सकूँ।ड्ढr फिलहाल अगले तीन माह के लिए राज्यपाल ने डॉ. अग्रवाल को ही फिर से कार्यवाहक कुलपति की जिम्मेदारी दे दी है। सवाल उठ रहे हैं। क्या यही वारदात किसी कद्दावर के साथ होती तो वे ऐसे बयान देते? क्या कार्रवाई के लिए संस्था का यह जुर्म पर्याप्त नहीं है कि उसने अयोग्य आरिफ से लम्बे समय तक एक्स-रे करवाए। चिविवि परिसर में इलाज कराने के लिए पूरे राज्य से लोग आते हैं। अब जब लोगों को यह पता चल रहा है कि निजी संस्था ने अयोग्य लोगों को तकनीकी पदों पर रखा हुआ है, तो कुलपति को ऐसी संस्था का ठेका रद करने के लिए कौन सा आधार चाहिए? जो हादसा गरीब की मासूम बच्ची के साथ हुआ, वह आगे किसी के साथ न हो, ऐसी कामना हर इनसान करता है। पर, कामना से क्या होता है।ड्ढr वारदातें होती हैं। होती रहेंगी। कद्दावर के साथ कुछ हो तो आरोपी पर खोज-खोज कर कानून लगा दिए जाते हैं। अगर गरीब है तो उसे कोई संज्ञान ले ले, यही बहुत है। पूर्व जज की बेटी लुटी तो दरोगा सस्पेण्ड कर दिया गया। शहर कप्तान के करीबी के साथ एयरपोर्ट पर स्टैण्ड वालों ने बदसलूकी कर दी तो खुद कप्तान सादे कपड़ों में पहुँचे और गिरफ्तारी तो हुई ही, गैंगेस्टर जैसी कार्रवाई भी हुई। सुखद पहलू यह है कि अब वहाँ जाने वालों को भी राहत मिल रही है। शहर में ढेरों ऐसे किस्से प्रचलित हैं, जब अफसर के घर वालों की चेन छिनती है तो मुकदमा भी लिखा जाता है और अधिकतर मौकों पर चेन मिलती भी है। भले ही दरोगा खरीद कर चेन वापस करे। यही छिनैती आम आदमी के साथ होती है तो थानेदार सही धारा में मुकदमा भी नहीं लिखते। पूरे शहर में वाहन स्टैण्डों पर गुण्डई देखी जा सकती है। प्रशासन की नींद केवल इसलिए नहीं टूटती कि वे खुद या उनका अपना इस बदसलूकी का शिकार नहीं होता। कार्रवाई की केवल एक नजीर तब मिली जब बलरामपुर अस्पताल के स्टैण्ड पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय के साथ बदसलूकी हुई। सत्ता के गलियारों में पहुँच वालों के दबाव में हुई कार्रवाई के अनगिनत किस्से आम हैं। यहाँ तो एक आईएएस अफसर की बेटी से प्रेम करने की सजा उसके सहपाठी को पुलिस ने मौत दे दी। घर वाले चीखते-चिल्लाते रहे। कुछ नहीं हुआ। अब मामला अदालत में है। बेहतर होता कि कुलपति जी परिसर से ऐसी संस्थाआें की छुट्टी करते और चिविवि और मेडिकल पेशे की साख कायम करने के लिए पहल करते। क्योंकि अभी भी न जाने कितने आरिफ परिसर में बने हुए हैं।

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  • Web Title: गरीब की बेटी का एक्स-रे और कद्दावर लोग