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पंचायतों की विकास योजनाआें की खुली पोल

विधानसभा की विशेष जांच समिति ने पंचायतों में चल रही विकास योजनाआें की पोल खोली है और नालंदा जिले के अस्थावां प्रखंड में वर्ष 1से 2002 तक चलाई गई ग्रामीण विकास विभाग की योजनाआें की जांच मंत्रिमंडल निगरानी विभाग से कराने की अनुशंसा की है। भोला प्रसाद सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा है कि जांच के दायरे में कार्यान्वित योजनाआें के साथ-साथ उन योजनाआें को भी शामिल करने की जरूरत है जो चल रही हैं। पिछले विधानसभा में तत्कालीन विधायक सतीश कुमार के एक प्रश्न पर विशेष जांच समिति का गठन 2003 में ही किया गया था।ड्ढr ड्ढr इस समिति की रिपोर्ट के अनुसार अस्थावां प्रखंड की पंचायतों में इंदिरा आवास के निर्माण को देखकर सदस्य ग्लानि से भर गए। इंदिरा आवास की छत से पानी टपक रहा था। उसमें गड्ढे उग आये थे। खिड़कियां नदारद थीं और किवाड़ नहीं लगाए गए थे। जांच में यह बात सामने आई कि इंदिरा आवास का निर्माण लाभान्वितों द्वारा नहीं कराया गया बल्कि उसमें ठेकेदारी लागू कर दी गई। गरीबों के इंदिरा आवास ठेकेदार खा गए। समिति के अनुसार इन्दिरा आवास के नाम पर लाभान्वितों को अधूरी और गुणवत्ता से हीन एक विपत्ति मिली जिसमें किसी भी समय उनकी मौत हो सकती थी। समिति को नालंदा के तत्कालीन जिलाधिकारी ने समेकित ग्रामीण विकास कार्यक्रम की जो रिपोर्ट दी उसमें वर्ष 1से 2000 तक गरीबों को मिली गायों में से 80 प्रतिशत को मरी हुई दिखला दी गईं। शेष का कोई अता-पता नहीं था। समिति के अनुसार ये योजनाएं भी दलालों और पदाधिकारियों की भेंट चढ़ गईं। जिन परिवारों को गाय-भैंसे दी गईं उनकी कोई सहकारिता समिति नहीं बनी। उनके दूध की बिक्री की कोई व्यवस्था नहीं की गई और बैंकों ने जो ऋण दिया उसका भुगतान नहीं हुआ। लाभान्वित लोग जीविका की खोज में अन्यत्र चले गए। समिति ने कहा है कि योजनाआें में अनियमितता हुई और भ्रष्टाचार का खेल खुलकर खेला गया। गरीबों के पैसे उनके घर जाने के पहले सफेदपोशों की भेंट चढ़ गए।

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  • Web Title: पंचायतों की विकास योजनाआें की खुली पोल