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बाढ़पीड़ित किसानों को विशेष रियायत की आशा

ेन्द्रीय वित्त मंत्री पी चिदम्बरम द्वारा सदन मंे शुक्रवार को पेश किया जाने वाला वर्ष 2008-0ा आम बजट बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के उन किसानों के मुर्झाये चेहरे को खिला सकता है, जिनकी फसल बाढ़ के कारण बर्बाद हो गई। सरकार इस बजट में प्रभावित किसानों के लिए विशेष पैकेज का एलान कर सकती है।ड्ढr ड्ढr बीती 27 फरवरी को केन्द्रीय वित्त मंत्री द्वारा विभिन्न राज्यों के सरकारी और सहकारी अधिकारियों के साथ दिल्ली मंे महत्वपूर्ण बैठक के बाद जो बातें छनकर सामने आयी हैं वह बिहार के किसानों के लिए फायदेमंद है। बताया जाता है कि बिहार, केरल, मध्यप्रदेश, राजस्थान व झारखंड में किसानों की खराब स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस बजट में किसानों के हित में प्रभावकारी फैसला लिया जा सकता है और यह बजट अबतक के आए बजटों मंे किसानों के लिए अबतक का सबसे लाभकारी बजट साबित हो सकता है। संभावना जतायी जा रही है कि शुक्रवार को संसद में पेश होने वाले बजट मंे लघु और बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए किसी विशेष पैकेज की घोषणा की जा सकती है। इसके अलावा प्रभावित किसानों द्वारा लिए गए कृषि ऋण या उसके सूद में भी रियायत या ऋण माफी की घोषणा की जा सकती है। किसानों द्वारा लिए जाने वाले ऋण का ब्याज दर कुल राशि का पांच प्रतिशत या उससे नीचे रख जा सकता है। इसके साथ ही किसानों के बीच ऋण वितरण की प्रक्रिया को और सरल बनाने की घोषणा वर्ष 2008-0े आम बजट में की जा सकती है। आम किसानों के दीर्घकालीन और छोटे ऋण पर भी छूट मिलने की संभावना है जबकि बड़े ऋणधारक किसानों को भी सूद में सशर्त रियायत दी जा सकती है। सूत्रों के अनुसार कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि उपकरणों, कृषि कार्य के लिए खरीदे जाने वाले ट्रैक्टरों, पावर टिलर एवं हार्वेस्टर की खरीद पर भी विशेष रियायत दी जा सकती है।ड्ढr ड्ढr किसानों को यह रियायत बड़े, मंझोले और छोटे किसान या जमीनों के वर्गीकरण के हिसाब से दी जा सकती है।ड्ढr सूत्रों के अनुसार कल आने वाले बजट मंे सहकारिता क्षेत्र को भी मजबूत बनाने के लिए विभिन्न घोषणाएं की जा सकती है। सहकारी बैंकांे के आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए केन्द्र सरकार की आेर से उन्हें विशेष पैकेज दिए जाने की संभावना है ताकि इन बैंकांे के माध्यम से किसानों को आसानी से कृषि ऋण और अन्य सुविधाएं प्राप्त हो सके। संभावना जतायी जा रही है कि वित्त मंत्री राज्य के सहकारी बैंकों को किसानों की जरूरत के हिसाब से नाबार्ड से प्राप्त राशि को सीधे किसानों तक पहुंचाने के निर्देश भी अपने बजट में दे सकते हैं।

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