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भाषा संस्थान के पुरस्कार घोषित,15 मार्च को बँटेंगे

उप्र भाषा संस्थान ने वर्ष 2007-08 के पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। संस्थान के कार्यकारी उपाध्यक्ष और वरिष्ठ व्यंग्यकार गोपाल चतुर्वेदी के अनुसार इन पुरस्कारों का वितरण 15 मार्च को किया जाएगा। इसी दिन उप्र हिन्दी संस्थान के भी पुरस्कार बटँगे।ड्ढr पंजाबी भाषा के लिए ढाई लाख रुपए की राशि का कांशीराम स्वाभिमान सम्मान पंजाब के मोंगा जिले के एक छोटे से गाँव के निवासी जसवंत सिंह कंवल को दिया जाएगा। o्री कंवल के पंजाबी भाषा में 15 उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी लिखी कहानियाँ भी काफी लोकप्रिय रही हैं। दो लाख रुपए की राशि का मराठी भाषा के लिए दिया जाने वाला रमाबाई महिला साहित्य सम्मान मुम्बई की डॉ. विजया राजाध्यक्ष को दिया जाएगा। महिला लेखकों में डॉ. राजाध्यक्ष की गिनती अग्रिम पंक्ित में की जाती है। हिन्दी में तकनीकी एवं वैज्ञानिक लेखन के लिए डेढ़ लाख रुपए की राशि संत कबीर सम्मान डॉ. गुणाकर मुले को दिया जाएगा। डॉ. मुले दिल्ली के निवासी हैं। उत्कृष्ट मीडिया लेखन के लिए डेढ़ लाख रुपए का संत रविदास सम्मान नवभारत टाइम्स के सम्पादक मधुसूदन आनंद को दिए जाने का निर्णय लिया गया है। उन्हें यह सम्मान उत्कृष्ट मीडिया लेखन और हिन्दी साहित्य से वषरे से जुड़े हुए होने के कारण दिया गया है। डेढ़ लाख रुपए की ही राशि के संत नामदेव सम्मान के लिए बिशन टण्डन को चुना गया है। यह सम्मान मूलत: निबंध, डायरी, आलोचना, संस्मरण, जीवनी, आत्मकथा आदि के क्षेत्र में दिया जाता है। o्री टण्डन भारतीय प्रशासनिक सेवा से जुड़े रहे और भारतीय ज्ञानपीठ व केके बिरला संस्थान से भी उनका नाता रहा है। इस समय वे नोयडा में रहते हैं। डेढ़ लाख रुपए की राशि के संत रामदास सम्मान के लिए अमर गोस्वामी को चुना गया है। यह सम्मान उनके उत्कृष्ट अनुवाद लेखन के लिए देने का निर्णय हुआ है। o्री गोस्वामी ने साठ से अधिक पुस्तकों का बंग्ला से हिन्दी में अनुवाद किया गया है।इनके चयन के लिए गठित समिति में लखनऊ विवि के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित, लखनऊ विवि के प्राचीन भारतीय इतिहास के विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेन्द्र नाथ कपूर व उप्र भाषा संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष गोपाल चतुर्वेदी शामिल थे। किसानों की भूमि का जबरिया अधिग्रहण नहीं होने देगी सरकारड्ढr विधानसभा (विसं)। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री लालजी वर्मा ने कहा है कि प्रदेश सरकार गंगा एक्सप्रेस वे और ताज एक्सप्रेस वे आदि किसी भी परियोजना में किसानों की भूमि का जबरिया अधिग्रहण नहीं होने देगी। श्री वर्मा गुरुवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री मायावती की ओर से उद्योग विभाग के बजट का जवाब दे रहे थे।ड्ढr उन्होंने कहा कि मायावती सरकार ने उद्योगपतियों को डराने और उनका शोषण करने वाले तत्वों पर प्रतिबंध लगाया है। अपराधी गतिविधियों को रोका है। मंत्री के जवाब से पहले कटौती पेश करते हुए कांग्रेस के प्रदीप माथुर ने आरोप लगाया कि प्रदेश में उद्योगों का माहौल नहीं है। एक विशेष उद्योगपति पर सरकार मेहरबान है। उन्होंने उद्योगपतियों के पार्टीलाइन पर बँटवारे का विरोध किया। ग्रेटर नोएडा व नोएडा सभी सरकारों की व्यवस्था बनकर रह गए हैं। वहाँ कोई नियम लागू नहीं है।ड्ढr पर्यावरण विभाग का बजट पेश करते हुए विभागीय मंत्री नकुल दुबे ने कहा कि प्रदूषण को कम करने के लिए सभी को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदूषण रोकने को कड़ी कार्रवाई की है। कानपुर में गंगा नदी में प्रदूषण फैलाने वाली 402 टेनरियों में 48 को बंद कराया है। अनेक उद्योगों को भी बंद किया है। सीएनजी गैस की व्यवस्था की है। कटौती पेश करते हुए भाजपा के सुरेश श्रीवास्तव ने कहा कि हिम ग्लेशियर का पिघलना चिंता का विषय है। विकलांग व पिछड़ा वर्ग कल्याण का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि बाकी बचे 23 जिलों में भी विकलांग कल्याण अधिकारी के पद सृजित कर दिए गए हैं। उद्योग, पर्यावरण, विकलांग एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभागों के बजट बहस के बाद ध्वनिमत से पारित हो गए।ड्ढr प्रदेश में बिना वातावरण सुधारे पूँजी निवेश नहीं बढ़ेगा : वर्माड्ढr विधानसभा (विसं)। प्रदेश में पूँजी निवेश कम होने का मसला गुरुवार को विधानसभा में उठा। सरकार ने कहा कि प्रदेश के बिगड़े हालात सुधारे जा रहे हैं। बिना अपराध नियंत्रण के पूँजी निवेश करने वाले प्रदेश में आकर्षित नहीं होगे। अवस्थापना विभाग की स्थापना भी की गई है। वातावरण ठीक किया जा रहा है। संसदीय कार्य मंत्री लालजी वर्मा ने भाजपा के हुकुम सिंह के सवाल का जवाब देते हुए बताया कि मार्च 2004 से मार्च 2007 की अवधि में प्रदेश में वृहद और मध्यम इकाइयों में मात्र 5555.30 करोड़ रुपए का पूँजी निवेश हुआ है। उन्होंने स्वीकार किया कि राज्य में पूँजी निवेश वातावरण पर निर्भर करता है। पिछले तीन वर्षो में पूँजी निवेश इसलिए कम हुआ कि प्रदेश में अपराध की स्थिति ठीक नहीं थी। जब पूँजी निवेश करने वाला अपने को यहाँ सुरक्षित महसूस करेगा तभी वह यहाँ निवेश करेगा। वर्तमान सरकार अपराध नियंत्रण में लगी है ताकि यहाँ पूँजी निवेश अपेक्षानुरूप बढ़े। इसके पूर्व हुकुम सिंह ने कहा कि यह चिंता की बात है कि यू.पी. से छोटे राज्यों में हर साल दस से लेकर पन्द्रह हजार करोड़ रुपए का पूँजी निवेश हो रहा है और यहाँ तीन वर्ष में मात्र साढ़े पाँच हजार करोड़ रुपए का पूँजी निवेश हुआ है। वह भी चीनी उद्योग में अधिक और अन्य क्षेत्रों में बहुत कम। उन्होंने कहा कि पाँच वर्षो में पाँच लाख करोड़ रुपए से अधिक के पूँजी निवेश की परिकल्पना की है, यह कैसे पूरी होगी जबकि पुराना इतिहास कुछ और कह रहा है।ं

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