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नेपाल सरकार और मधेशी मोर्चा में हुआ समझौता

नेपाल सरकार और संयुक्त लोकतांत्रित मधेशी मोर्चा (यूडीएमएफ ) के बीच गुरुवार को आठ सूत्रीय समझौता होने के साथ ही देश के दक्षिणी तराई क्षेत्र में गत 16 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल समाप्त हो गई। सत्तारूढ सात दलीय गठबंधन सरकार की आेर से प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला और मोर्चा से संबंद्ध तीन दलों नेपाल सदभावना पार्टी मधेशी जन अधिकार मंच (एमपीआरएफ.) और तराई मधेश लोकतांत्रिक पार्टी ने आठ सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत नेपाली सेना में मधेशी लोगों की बड़े पैमाने पर भर्ती की जाएगी।ड्ढr ड्ढr मोर्चा के नेता महंथ ठाकुर ने समझौते के बाद बालुवतार में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि नए नेपाल नई दृष्टिनई विचार धारा और नई परिकल्पना की आवश्यकता और शासन ढांचा तंत्र एवं सामाजिक परिवर्तन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संशाधनों और सेवाआें की पहुंच देश के सभी व्यक्ितयों तक होनी चाहिए और इनका वितरण न्यायपूर्ण तरीके से होना चाहिए। श्री ठाकुर ने कहा कि इसके बाद ही समान अधिकार और अवसर हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मधेश में उनका प्रदर्शन समानता और मधेशी लोगों की पहचान दिलाने के वास्ते था न कि किसी व्यक्ित विशेष के विरूद्ध। श्री ठाकुर ने मधेशी लोगों को मिले आश्वासन को मधेशी शहीदों के बलिदान का परिणाम करार देते हुए कहा कि प्रदर्शन के बल मिले अधिकोरों की सुरक्षा और समझौते को लागू कराने की जिम्मेदारी अब मधेशी दलों पर है। उन्होंने यह भी बताया कि मधेशी लोगों के अपने अधिकारों को लेकर सड़कों पर नहीं उतरने का आश्वासन भी दिया गया है।ड्ढr ड्ढr उन्होंने कहा कि मधेशी गौरव को फिर से हासिल करने की दियाा में यह समझौता पहला कदम है और निर्वाचित संविधान सभा के माध्यम से इस समझौते को लागू करने में प्रत्येक व्यक्ित का समर्थन चाहिए। तराई मधेशी लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष श्री ठाकुर ने हथियारबंद अन्य प्रदर्शनकारी संगठनों को वार्ता के मंच पर आने की आवश्यकता बताई। समझौते के मद्देनजर मोर्चा ने हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी। नेपाल सरकार और मोर्चा के बीच हुई इस समझौता बैठक में मोर्चा के नेता श्री ठाकुर के साथ ही राजेन्द्र महतो उपेन्द्र यादव हृदयेश त्रिपाठी, रेणु यादव और अनिल कुमार झा मौजूद थे। इस समझौते के साथ आगामी 10 अप्रैल को होने वाले संविधान सभा चुनाव का मार्ग भी प्रशस्त हो गया। पहले इस हड़ताल की वजह से इस चुनाव पर बादल मंडराने लगा था और नामाकंन की तिथि बढ़ानी पड़ी थी। सूत्रों ने बताया कि प्रारंभ में प्रधानमंत्री आवास पर सत्तारूढ गठबंधन के तीन प्रमुख घटक दलों के नेताआें की बैठक हुई और उसमें मोर्चा की मांगों पर विचार किया गया जिसके बाद गृह मंत्री कृष्णा प्रसाद सितौला ने वार्ता के लिए मोर्चा के नेताआें को बुलाया। बैठक में सरकार की आेर से प्रधानमंत्री और नेपाल कांग्रेस प्रमुख गिरिजा प्रसाद कोइराला कम्युनिस्ट पार्टी आफ नेपाल, यूएमएल के महासचिव माधव कुमार नेपाल माआेवादी प्रमुख प्रचंड और श्री सितौला के अतिरिक्त अन्य दलों के प्रतिनिधि भी शामिल है। इससे पहले भी हड़ताल समाप्त करने के लिए कई दौर की वार्ता हुई थी लेकिन नेपाली सेना में मधेशी लोगों की भर्ती की मांग का यूएमएल और माआेवादियों द्वारा विरोध किय ेजाने के कारण वार्ता सफल नहीं हो पाई थी।

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