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चरणामृत नहीं पा सका बीमा सेक्टर

उम्मीद के बावजूद सरकार इंश्योरेंस सेक्टर को चरणामृत नहीं पिला पाई। गुरुवार को सरकार की तरफ से संसद में रखे गए आर्थिक सर्वेक्षण में हालांकि सरकार ने बीमा सेक्टर में प्रत्यक्ष पूंजी निवेश (एफडीआई) की सीमा को बढ़ाने की तुरंत जरूरत बताई थी। पर आम बजट को पेश करते हुए वित्तमंत्री पी. चिदम्बरम ने इस तरह का कोई भी संकेत नहीं दिया। आर्थिक सर्वेक्षण में सरकार ने इस बात को बड़ी ही शिद्दत से स्वीकार कर लिया कि बीमा क्षेत्र में एफडीआई को 4प्रतिशत तक करना जरूरी है। बहरहाल, अब देखना पड़ेगा कि सरकार अपनी इस इच्छा को अमली जामा पहनाने में कामयाब कब होगी। बीते चंदेक सालों की बीमा सेक्टर सरकार से एफडीआई की सीमा को 26 से सीधे 74 प्रतिशत करने की मांग करता रहा है। पर इतनी बढ़ोतरी होने की किसी ने उम्मीद नहीं की थी। इस सेक्टर पर पैनी नजर रखने वाले कह रहे थे कि सरकार 4प्रतिशत से अधिक एफडीआईकी इजाजत नहीं देगी। महत्वपूर्ण है कि चार साल पहले केन्द्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार के सत्तासीन होने के बाद कहा गया था कि सरकार इंश्योरेंस सेक्टर में सुधार करने में देरी नहीं करेगी। इस तरह की घोषणा करके वह साफ तौर पर बताना चाह रही थी कि इंश्योरेंस सेक्टर में एफडीआई 26 फीसदी से 4प्रतिशत कर दी जाएगी। पर लेफ्ट पार्टियों के कड़े दबाव के चलते वह अपने वादे को निभा नहीं सकी। इस बीच, एविवा इंडिया इंश्योरेंस के भारत में प्रबंध निदेशक बर्ट पैटरसन कहते हैं कि अगर सरकार एफडीआई के बारे में अपने वादे पर अमल कर ले तो बीमा सेक्टर की पुरानी मांग पूरी हो जाएगी। आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया कि साल 2000-01 के दौरान प्रीमियम से बीमा कंपनियों ने 34,8रोड़ रुपये हासिल कि ये। यह आंकड़ा साल 2006-07 में बढ़कर 1,56,041 करोड़ तक जा पहुंचा है। जाहिर है कि बीमा सेक्टर ने हाल के सालों में लम्बी छलांग तो लगाई है। वर्तमान में देश 37 बीमा कंपनियां लाइफ, नॉन लाइफ और री-इंश्योरेंस के कारोबार में सक्रिय है। इनमें प्रुडेनशल, एलाएंज, स्टैंडर्र्ड, एआईजी, एविवा, मैक्स, सन लाइफ और आईएनजी जैसी चोटी की विदेशी कंपनियां भी हैं। इनके अलावा फ्रांस की बड़ी बीमा कम्पनी एक्सा, कोरिया की सैमसंग, इटली की जेनरली, बेल्जियम की फोर्टिस, हालैंड की एगॉन और जापान की सोमपो भी भारतीय बाजार में आने के लिए बेताब हैं। इतनी अधिक कंपनियों के होने के बाद भी बीमा की दुनिया के जानकार मानते हैं कि अब भी बाजार में कई और कम्पनियों के लिए स्पेस बचा हुआ है।ड्ढr

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