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यौमे अली अकबर पर उठा शबीह-ए-ताबूत

र्बला के शहीदों का चेहल्लुम मना चुके शिया व सुन्नी अजादार, हजरत इमाम हुसैन को पुरसा देने को बेकरार हैं। जगह-जगह अशरा-ए-मजालिस का दौर शुरू हो गया है।ड्ढr शुक्रवार को यौमे अली अकबर के मौके पर इमामबाड़ा मीर सौदागर परिसर में अलम व ताबूत का जुलूस निकाला गया। इसके पहले मजलिस को मौलाना सैयद मोहम्मद शुएब इत्तेहादी ने सम्बोधित किया। मजलिस के बाद अंजुमन-ए-मातमी ने नौहख्वानी कर मातम किया। सफीर-ए-हुसैनी की आेर से इमामबाड़ा मिर्जा मेंहदी हसन काजमैन रोड पर सात दिवसीय मजलिस की पहली मजलिस को मौलाना अली रिजवान जैदपुरी ने सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि कर्बला की शहादत ने इस्लाम को नई ताकत अता की है। मौलाना ने आखिर में जब कर्बला में हजरत इमाम हुसैन और मासूम अली असगर की शहादत का जिक्र किया तो मजलिस सुन रहे अजादार फफक पड़े। हसन पुरिया में इदारा-ए-सकीना की आेर से 72 शहीदों की याद में 72 पकवानों पर नज्र दिलाई गई। इस दस्तरख्वान के पहले एक मजलिस हुई जिसमें मौलाना हसनैन जावेद ने मर्सिया पेश कर कर्बला कर मंजर बयान किया। उधर, सुन्नी मरकज की आेर चेहल्लुम शोहदा-ए-कर्बला बालागंज में आयोजित हुआ। इसको गाजि-ए-मिल्लत सैयद मोहम्मद हाशमी ने सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि आज इस्लाम जिंदा है तो सिर्फ कर्बला में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों के बलिदान और सब्र की बदौलत।ड्ढr सालाना उर्स शुरूड्ढr द्य हजरत मखदूम शाहमीना शाह के सालाना उर्स की शुरुआत शुक्रवार को कुरआन की तिलावत और मिलाद शरीफ से हुई। इस मौके पर मिलाद शरीफ को फिरंगी महल के मौलाना मतीन मियाँ ने सम्बोधित किया।

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