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बजट देश की जनता को समर्पित:वित्तमंत्री

संसद में बजट पेश करने के तुरंत बाद वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम के साथ ‘हिन्दुस्तान’ की प्रधान सम्पादक मृणाल पाण्डे ने लोकसभा चैनल पर विस्तृत बातचीत की। इस वार्ता में टेलीग्राफ के वरिष्ठ पत्रकार जयंत राय चौधरी भी शामिल थे। बातचीत के प्रमुख अंश :-ड्ढr मृणाल पाण्डे : स्टूडियो में आपका स्वागत है। आपके इस बजट का मुख्य बिन्दु क्या है?ड्ढr चिदम्बरम : यह बजट देश की जनता को समर्पित है। इसका लक्ष्य विकास की तेज गति को बरकरार रखना और निवेश को प्रोत्साहन देना है। विकास के मार्ग में आने वाली बाधाआें को दूर करने का प्रयास भी किया गया है। विकास का लाभ आम आदमी तक पहुंचाना जरूरी है। इसीलिए किसानों का विशेषतौर पर ध्यान रखने का प्रयास किया गया है। साथ ही विकास का लाभ अनुसूचित जातियों, जनजातियों, महिलाआें, अल्पसंख्यकों तथा गरीबों तक पहुंचाने पर बल दिया गया है।ड्ढr मृणाल पाण्डे : पूंजी के निर्माण की कितनी प्राथमिकता दी गई है?ड्ढr चिदम्बरम : निवेश से ही पूंजी का सृजन होता है। इसका सीधा संबंध रोजगार, आय और विकास से है। हमारे बजट का उद्देश्य निवेश और पूंजी सृजन को बढ़ावा देना है। कृषि, सिंचाई, बिजली, सड़क आदि में निवेश को बढ़ावा देकर हम ऊंची विकास दर बनाए रखना चाहते हैं।ड्ढr जयंत : कृषि क्षेत्र का बजट में विशेष ध्यान रखा गया है। संकट से जूझ रहे कृषि क्षेत्र के लिए यह जरूरी भी था।ड्ढr चिदम्बरम : हमारी कृषि विकास दर 2.6 प्रतिशत है जो निर्धारित 4 प्रतिशत के लक्ष्य से कम है। कृषि क्षेत्र के लिए वित्त मंत्रालय तो धन ही उपलब्ध करा सकता है। बाकी काम तो संब मंत्रालयों और राज्य सरकारों के जिम्मे है। पानी, बीज, उर्वरक, अनुसंधान और तकनीक का खेती से सीधा संबंध है। इनकी जिम्मेदारी राज्य सरकारों की हैं। कर्ज से दबे किसानों को राहत देने के लिए कर्ज माफी का निर्णय लिया गया है। निश्चय ही यह एक बड़ादम है किन्तु खेती के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है।ड्ढr जयंत : बजट में केन्द्र सरकार ने 6 लाख करोड़ रुपए की राजस्व प्राप्ति का अनुमान प्रकट किया है?ड्ढr चिदम्बरम : यदि आर्थिक विकास दर आठ और दस प्रतिशत के बीच हो तो लोगों को कर देने में कोई परेशानी नहीं होती। यदि आमदनी बढ़ रही है, चहुंमुखी विकास हो रहा है तो फिर पैसा आ ही जाता है। मुझे विश्वास है कि हम राजस्व प्राप्ति का निर्धारित लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे।ड्ढr मृणाल पाण्डे : बजट में जनकल्याणकारी योजनाआें का काफी ध्यान रखा गया है। लेकिन एक वर्ग ऐसा है जो राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना जैसी पहलों का आलोचक है। उनकी नजर में ऐसी जनकल्याण योजनाआें में धन लगाना अनुत्पादक है?ड्ढr चिदम्बरम : मैं इस विचार से कतई सहमत नहीं हूं। शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे जनकल्याणकारी कार्यक्रमों पर खर्च किया गया धन अत्यावश्यक और उत्पादक होता है। महिला व बच्चों की शिक्षा व स्वास्थ्य देश के विकास के लिए जरूरी है। वास्तव में ऐसी मदों पर खर्च करने से पूंजी निर्माण ही होता है। स्वस्थ और शिक्षित नागरिक किसी भी देश की पूंजी होते हैं। कोई भी अच्छी सरकार जनकल्याण कायरे की उपेक्षा कर सकती है!ड्ढr मृणाल पाण्डे : जनकल्याणकारी योजनाआें के प्रति राज्य सरकारों का रवैया कैसा है जमीनी स्तर पर इन्हें लागू तो वे की करेंगी।ड्ढr चिदम्बरम : इन योजनाआें के अमल का उत्तरदायित्व राज्य सरकारों का होता है। जिन राज्यों में अच्छी सरकारें हैं वहां जनता को ज्यादा लाभ पहुंच पाता है। अच्छी सरकार, बेहतर शासन का अर्थ है बेहतर अमल। इसलिए मैं जनता से अपील करता हूं कि वह अपने राज्यों में अच्छी सरकार चुने। इसका फायदा उसे ही होगा।ड्ढr जयंत : वेतन आयोग के सिफारिशों पर अमल, किसानों के कर्ज माफी जैसे कदम क्या महंगाई को नहीं न्यौतेंगे?ड्ढr चिदम्बरम : किसानों के कर्ज माफ करना जरूरी है। जनकल्याण के कदमों का अर्थ विकास अवरु करना नहीं है। यदि उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार बढ़ेगा तो खपत में भी इजाफा होगा। इससे निवेश को बल मिलेगा। किसी कारण यदि मुद्रा स्फीति की दर में वृ िहोती है तो उस पर काबू पाने के लिए सरकार राजकोषीय व मौद्रिक उपाय कर सकती है।ड्ढr मृणाल पाण्डे : नौजवानों के सेना की आेर कम होते रुझान पर आपने चिंता व्यक्त की है इसके लिए बजट में क्या उपाय किए गए हैं?ड्ढr चिदम्बरम : निश्चय ही सेना आज योग्य अधिकारियों की कमी से जूझ रही है। पिछले कुछ वषरे में सैनिक स्कूलों की उपेक्षा हुई है। हमने बजट में प्रत्येक सैनिक स्कूल को दो-दो करोड़ रुपए देने का निश्चय किया है। देश में कुल 22 सैनिक स्कूल हैं। इस धन की मदद से वहां अब अच्छे पुस्तकालय, अच्छी प्रयोगशाला बनाई जा सकेंगी। सैनिक स्कूलों की आेर बच्चे आकर्षित होंगे। वर्तमान थलसेनाध्यक्ष भी सैनिक स्कूल की देन हैं।ड्ढr जयंत : बजट में किसानों के कर्ज माफी की बड़ी घोषणा है। कारपोरेट जगत के लिए क्या रियायतें हैं?ड्ढr चिदम्बरम : कारपोरेट क्षेत्र क ो बढ़ावा देने के लिए कर में दो प्रतिशत की छूट दी गई है। यह सभी वस्तुआें पर लागू है। इसके अलावा दो पहिया वाहनों, छोटी कारों आदि पर तो कर राहत और अधिक है। विनिर्माण क्षेत्र रोजगार प्रदान करने वाला क्षेत्र है, इस कारण इसको बढ़ावा देना आवश्यक है।ड्ढr जयंत : अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। भारत पर इसका कितना असर पड़ सकता है?ड्ढr चिदम्बरम : हमारी अर्थव्यवस्था अमेरिका पर निर्भर नहीं है। आज दुनिया के अनेक देशों से हमारा आर्थिक रिश्ता काफी मजबूत है। चीन से हमारा व्यापारिक संबंध दृढ़ है। एशिया, यूरोप, अफ्रीका और लटिन अमेरिका के अनेक राष्ट्रों की आर्थिक स्थिति मजबूत है और इनमें से अनेक से हमारा लेन-देन है। दुनिया के 100 से अधिक देशों की विकास दर पांच प्रतिशत से अधिक है। मैं आशा करता हूं कि अमेरिका पर मंदी के बादल नहीं छाएंगे और यदि छाए तो भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर उसका कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा।ड्ढr मृणाल पाण्डे : जब हम सामाजिक मुद्दों की बात करते हैं तो महाराष्ट्र की आेर ध्यान जाता है जहां हिन्दीभाषी मजदूरों को भगाने के लिए हिंसक आन्दोलन चलाया जा रहा है।ड्ढr चिदम्बरम : भारत का अर्थ है एक राष्ट्र, एक मार्केट। हिंसा का सहारा लेकर इस भावना को आहत किया जा रहा है। मुम्बई देश की कामर्शियल कैपिटल है। वहां ऐसे व्यवहार को स्वीकार नहीं किया जा सकता। देश में प्रत्येक नागरिक को कहीं भी रोजगार करने की स्वतंत्रता है।ड्ढr जयंत : विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए क्या उपाय किए गए हैं?ड्ढr चिदम्बरम : आज हमें विदेशी निवेश आकर्षित करने की कसरत करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यह तो गुजरे जमाने की बात है। आज बड़ी संख्या में विदेशी निवेशक भारत आने के इच्छुक हैं। समस्या अब रेगुलेशन की है। देखना यह है कि ऐसे निवेश का लाभ जल्दी से जल्दी कैसे पाया जाए।ं

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