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ठेकेदार ने की शिकायत जांच करने का आदेश्

भवन निर्माण विभाग में ‘काम पहले, टेंडर बाद में’ का खेल बदस्तूर जारी है। मार्च के मद्देनजर यह गोरखधंधा परवान पर है। विभाग का इंजीनियर सेल ऊपर से नीचे तक इस खेल में शामिल है। रांची भवन प्रमंडल एक और दो में तो करोड़ों का खेल होता है, लेकिन दूसरे डिवीजन में भी यह खेल खुलकर चल रहा है। हजारीबाग डिवीजन का एक मामले सामने आया है। इसमें ठेकेदार की शिकायत पर मंत्री ने जांच का आदेश दिया है। विभाग के विशेष सचिव एपी चौधरी ने मुख्य अभियंता से जांच रिपोर्ट मांगी है।ड्ढr गिद्दी के रहनेवाले मुकेश कुमार उपाध्याय ने मंत्री को बताया है कि हजारीबाग जेपी कारा में वार्ड निर्माण का काम दिये जाने के बाद बीच में ही काम से हटा दिया गया।ड्ढr ठेकेदार का कहना है कि निर्माण कार्य में उसके चार लाख रुपये लग गये हैं। कार्य जब प्रगति पर था, तो जेइ ने काम बंद करने को कहा। ठेकेदार के मुताबिक इसी काम (योजना) का टेंडर फरवरी महीने में निकाला गया है। ठेकेदार के मुताबिक पहले इंजीनियरों ने उसे ही काम करने को कहा था। जेल परिसर में छानबीन करने से यह साफ हो जायेगा।ड्ढr ठेकेदार ने मंत्री से कहा है कि जिस योजना के क्रियान्वयन में चार लाख खर्च हो चुका है जाहिर है उसे पूरा करने में कम पैसे लगेंगे, जबकि इंजीनियर और दूसरा ठेकेदार योजना की पूरी लागत निकाल लेंगे। ठेकेदार ने मंत्री से चार लाख रुपये का भुगतान कराने की गुहार लगायी है।

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