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साल के अंत तक देश की ३० फीसदी आबादी शहरों में होगी

गांव की पतली पगडंडियां, ऊंचे पेड़ों पर सरपट चढ़ते छोटे-छोटे बच्चे, पनघट पर पानी भरती बालाएं और कच्ची मिट्टी की सोंधी खुशबू शायद जल्द ही झारखंड के लोगों को भी बीते समय की याद दिलायेगी। आशंका तो इस बात की भी है कि तेजी से बढ़ रही शहरी आबादी कहीं जल्द ही गांवों को लील न जाये। हाल ही में आरआरडीए ने शहर का दायरा बढ़ाते हुए 325 गांवों को शामिल कर लिया है। इन गांवों में अब पतली पगडंडिया नहीं मिलेंगी। पिछले मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी सर्वे के अनुसार साल के अंत तक भारत की 30 फीसदी आबादी गांवों से निकलकर शहरों में बस जायेगी। भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है। इस सर्वेक्षण के अनुसार मानव इतिहास में शायद ऐसा पहली बार होगा, जब दुनिया की आधी आबादी 2008 के अंत तक शहरों में रहने लगेगी। वर्ष 2050 के अंत तक 70 प्रतिशत लोग शहर में रहने लगेंगे। वर्तमान में भारत की 70 फीसदी आबादी गांवों में रह रही है। भारतीय नीति निर्माता इस पलायन को रोकने के लिए ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था को तेजी से बढ़ाने में लगे हैं। इसके लिए वे कृषि क्षेत्रों में सुधार तो कर ही रहे हैं, एग्रो इंडस्ट्रीज को भी बढ़ाने में लगे हैं। इस तरह से वहां कम से कम लोगों से काम हो जायेगा और बचे लोग रोजगार के लिए शहरों का रुख करेंगे, जो शहरीकरण को बढ़ानेवाली प्रक्रिया होगी। भारत में दिल्ली और मुंबई जैसे शहर बढ़ेंगे, जहां लोग पलायन कर आते हैं।

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