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शशांक ने मंत्री का दर्जा छोड़ा

ैबिनेट सचिव शशांक शेखर ने प्रदेश सचिवालय के शासकीय प्रधान का दायित्व तथा कैबिनेट मंत्री का प्राप्त दर्जा छोड़ दिया है। बहरहाल, श्री सिंह मंत्रिमंडलीय सचिव रहेंगे। श्री सिंह राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष पद पर भी बने रहेंगे।ड्ढr मुख्य सचिव प्रशांत कुमार मिश्र को अब प्रदेश का शासकीय प्रधान बना दिया गया है। मुख्यमंत्री मायावती ने शनिवार को विधानसभा में यह घोषणा की। उन्होंने किडनी काण्ड पर कैबिनेट सचिव पर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि ‘अगर मुझे अधिकारी को बचाना होता तो यह मामला सीबीआई जाँच के लिए न देती। इससे बड़ी सरकार की निष्पक्षता और क्या हो सकती है?’ मुख्यमंत्री के वक्तव्य के समय नेता प्रतिपक्ष मुलायम सिंह यादव भी सदन में मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण पर अपने विचार व्यक्त करते हुए श्री यादव ने कैबिनेट सचिव को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिए जाने तथा शासकीय प्रधान बनाने पर आपत्ति जताई थी। न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के कारण उस समय मैंने कुछ भी कहना उचित नहीं समझा था।ड्ढr उन्होंने बताया कि कैबिनेट सचिव का एक पत्र 2रवरी की शाम उन्हें मिला जिसमें उन्होंने स्वेच्छा से मंत्री का दर्जा तथा सचिवालय के शासकीय प्रधान के पद व दायित्वों से मुक्त किए जाने का आग्रह किया गया था। सरकार ने उनका अनुरोध स्वीकार कर लिया है। इस संबंध में 2रवरी को ही आवश्यक शासनादेश जारी कर दिया गया। जिसमें पूर्व के सभी आदेशों को निरस्त करते हुए मुख्य सचिव को शासकीय प्रधान बना दिया गया है। सैफई काण्ड में इटावा के एसएसपी पर मुकदमाड्ढr इटावा (हिसं.)। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राकेश नैन ने शनिवार को इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सियाराम शरण आदित्य के खिलाफ प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध दर्ज करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश चौधरी चरण सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय सैफई हैंबरा में जनवरी 2008 को हुए गोली काण्ड के संबंध में दिए गया हैं। सीजेएम का आदेश थाना सैफई के लिए किया गया है।ड्ढr जनवरी 2008 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सियाराम शरण आदित्य व अपर पुलिस अधीक्षक रामपाल गौतम, कांस्टेबल मलखान सिंह, राजीव दुबे, श्रीकृष्ण सैनी, संजीव गौतम व अन्य ने उक्त महाविद्यालय में घुसकर छात्रों व अध्यापकों के साथ र्दुव्‍यवहार किया था। इसका विरोध किए जाने पर इन लोगों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें मुकेश, अवनीश और सुनील घायल हो गए थे। मुकेश की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। रिपोर्ट कराने गए स्कूल के चपरासी रामगोपाल को पुलिस ने दो दिन थाने में बैठाए रखने के बाद धमकाकर छोड़ दिया था। सैफई कांड की सूचना रामगोपाल ने केन्द्रीय गृह मंत्री, मुख्यमंत्री, आईजी-कानपुर तथा डीआईजी को फैक्स से दी थी। 12 जनवरी को उसका एक प्रार्थना पत्र थाने में रिसीव किया गया था, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई थी।इसके बाद उसने न्यायालय की शरण ली। मामले में सीजेएम के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता बृजेन्द्र गुप्ता ने 28 फरवरी को अपना पक्ष रखा। और, आज एक मार्च को अदालत ने प्रथम दृष्टया इसे संज्ञेय अपराध मानते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहित नामजद लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराने के आदेश दे दिए।

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