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परमाणु करार हाइड एक्ट से परे

अमेरिका से एटमी करार पर लोकसभा में सोमवार को विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी के बयान के बाद फिर देश की राजनीति में बवंडर उठने की आशंका है। उन्होंने साफ कहा-‘भारत अमेरिका में पारित हाइड एक्ट से बँधा नहीं है।’ उन्होंने कहा कि परमाणु सहयोग को 123 समझौते के तहत ही अमल में लाया जाएगा। हाइड एक्ट केवल अमेरिकी प्रशासन और वहाँ की संसद के बीच का मुद्दा है। प्रणव का यह बयान इस मायने में महत्वपूर्ण है कि हाइड एक्ट पर ही सरकार के सहयोगी वामदल और विपक्षी भाजपा करार का विरोध कर रहे हैं। हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीसा राइस ने भी हाइड एक्ट को भारत के लिए बाध्यकारी बताने की कोशिश की थी।ड्ढr लोकसभा में श्री मुखर्जी ने कहा कि करार को अंतिम रूप देने के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) से पाँच दौर की बातचीत पूरी हो चुकी है। सूत्रों का दावा है कि भारत को निगरानी वाले रिएक्टरों के लिए आजीवन ईंधन सुनिश्चित करने की शर्त जैसे अनेक विकल्पों पर काम हो चुका है। भारत को सिर्फ अपनी पसंद का विकल्प बताना है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि वार्ता में भारत की 80 फीसदी शर्ते मान ली गई हैं। यदि बाकी 20 फीसदी बातें भी मान ली जाएँ तो फिर कोई विरोध क्यों करेगा। परमाणु करार पर अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया की तलवार लटकी है। इस बीच, आईएईए के मुखिया मोहम्मद अल बरादेई ने सोमवार को एक सुझाव में परमाणु ईंधन बैंक बनाने पर जोर दिया है, जिसका लाभ एनपीटी देशों को मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि इसी मैकेनिज्म को अपना परमाणु निशस्त्रीकरण को बल मिल सकेगा।ड्ढr वाम स्वर फिर तल्ख हुए : पृष्ठ 11ं

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