DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पटना संग्रहालय में सुविधा के नाम पर कुछ नहीं

देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के बेहतरीन संग्रहालयों में शुमार होने वाले पटना संग्रहालय में पर्यटक सुविधाओं का घोर अभाव है। अंतर्राष्ट्रीयस्तर के संग्रहालयों में जिस तरह की सुविधाएं पर्यटकों को मयस्सर होती हैं यहां नहीं मिल रही हैं। यहां पर विदेशी पर्यटकों की तादाद देश के किसी भी प्रसिद्ध संग्रहालय से कम नहीं है। बुद्ध अस्थिकलश के चलते बौद्ध पर्यटकों के लिए यह आकर्षण का केन्द्र रहता है। मोनालिसा की तरह विश्व की अनुपम कृतियों में शुमार होनेवाली यक्षिणी की मूर्ति भी पर्यटकों को यहां खींच लाती है।ड्ढr ड्ढr आधुनिक म्यूजियम के वर्गीकरण व गुणवत्ता के आधार पर पटना संग्रहालय को अंतर्राष्ट्रीयस्तर का माना जाता है। प्रस्तर शिल्प कला, धातु शिल्प कला, पाल कला, मौर्यकालीन कई ऐसी दुर्लभ मूर्तियां यहां हैं जो दुनिया के किसी म्यूजियम में नहीं है। बुलंदीबाग से मिली टेराकोटा की नृत्य करती मूर्ति , लाफिंग ब्यॉय व स्माइलिंग गर्ल ,पाल काल की मैत्रेयी व बुद्ध की मूर्ति, कुर्कीहारा में मिली धातु कला की मूर्ति व उत्तर गुप्तकाल की मूर्तियां यहां की सबसे बड़ी खासियत है।ड्ढr जानकारों के मुताबिक इस स्तर के संग्रहालय में एक सुसज्जित कैफेटेरिया होनी चाहिए पर यहां नहीं है। भूख लगने पर पर्यटकों को परिसर से बाहर जाना पड़ता है। शौचालय व पीने का पानी का समुचित प्रबंध नहीं है।ड्ढr ड्ढr पर्यटकों की सुविधा के लिए कलाकृतियों की प्रतिकृतियों की बिक्री के लिए काउंटर सेल रहना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक म्यूजियम घूमने में लगभग दो से तीन घंटे लग जाते हैं। इस दौरान पर्यटकों को शौचालय जाने की भी आवश्यकता महसूस होती है पर इसका समुचित इंतजाम यहां नहीं है। पर्यटक दीर्घाओं की सैर करते-करते थक जाते हैं पर उन्हें आराम करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। कई ऐसे पर्यटक ऐसे भी आते हैं जिनके पास काफी सामान रहता है पर यहां क्लॉक रूम की व्यवस्था नहीं है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: पटना संग्रहालय में सुविधा के नाम पर कुछ नहीं