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मथुरा में शिवरात्रि पर लगता है भक्तों का जमघट

भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र द्वारा यहां बनवाए गए गोपेश्वर शिव मंदिर में महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुआें का जमघट लग जाता है। यहां गोपियों को निगरुण भक्ित का संदेश देने आए उद्धव गोपियों के स्नेह से ऐसे अभिभूत हुए कि उन्हें यहां से जाना मुश्किल हो गया था। यमुना, ब्रज रज एवं श्री गिरिराज जी जैसे श्रीकृष्ण लीलाआें के गवाह यहां आज भी मौजूद हैं। द्वापर में महारास देखने के लिए शिव जी को यहां गोपीवेश धारण करना पड़ा था। यहां परमकल्याणकारक भगवान शंकर, श्रीकृष्ण से मिलने दो बार आए थे। पहली बार मां यशोदा ने जब उन्हें लला के दर्शन कराने से मना कर दिया तो नन्दगांव की पहाड़ियों में वह धूनी रमाकर बैठ गए लेकिन बाद में यशोदा ने उन्हें लला के दर्शन करा ही दिए। दूसरी बार वृन्दावन में भगवान शंकर पार्वती जी के साथ महारास करने के लिए आए थे। गर्ग संहिता का जिक्र करते हुए गोपेश्वर शिव मंदिर के महंत रामगोपाल गोस्वामी ने बताया कि जब त्रिपुरारी भगवान शंकर ने महारास क्षेत्र में प्रवेश करने का प्रयास किया तो बाहर तैनात एक गोपी ने उन्हें रोक दिया और कहा कि महारास में तो केवल स्त्री का ही प्रवेश संभव है। परमपुरुष तो केवल श्रीकृष्ण हैं। इसके बाद पार्वती जी तो महारास में प्रवेश कर गईं, लेकिन भोलेनाथ बाहर ही रह गए। भगवती अन्नपूर्णा के पति शंकर ने जब महारास में प्रवेश करने की जिद्द की तो गोपी ने उन्हें स्त्री वेश धारण कर आने का सुझाव दिया।

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