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धोनी की धूम

रिकी पोंटिंग की भविष्यवाणी सच्ची साबित हुई। त्रिकोणीय श्रंखला का फाइनल मुकाबला शुरू होने से पहले आस्ट्रेलिया के बड़बोले कप्तान ने कहा था कि तीन मैचों का फाइनल हम दो मैचों में ही निपटा देंगे। फाइनल का फैसला तो दो मैचों में ही हो गया, लेकिन परिणाम पोंटिंग की कल्पना से परे रहा। भारत ने विश्व चैंपियन आस्ट्रेलिया को उसकी ही धरती पर धूल चटा दी। महेन्द्र सिंह धोनी ने 20-20 का विश्व कप खिताब जीतने जैसी उपलब्धि अर्जित की। कुआलालाम्पुर में किशोर टीम के विश्व चैंपियन बनने के कुछ घंटे बाद ही क्रिकेट प्रेमियों को जश्न मनाने का एक और मौका मिल गया। जब भारत ने आस्ट्रेलिया का दौरा शुरू किया था, तब ऐसी विजय की कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। पाताल नगरी की परिक्रमा करने से पहले नीली वर्दी के खिलाड़ियों को अपनी बल्लेबाजों पर ज्यादा भरोसा था। अब टीम में गेंदबाजों की तूती बोल रही है। भारतीय गेंदबाजों ने पूरी प्रतियोगिता में मेजबान टीम को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। इशांत शर्मा और प्रवीण कुमार नए सितारे बनकर उभरे। ब्रिसबेन के मैदान पर सचिन तेंदुलकर की रन की शानदार पारी ‘मैन आफ दि मैच’ रहे प्रवीण कुमार की घातक गेंदबाजी (46 रन पर 4 विकेट) के सामने फीकी पड़ गई। भारत ने त्रिकोणीय श्रंखला ही नहीं जीती, आस्ट्रेलिया का मान-मर्दन भी किया है। विपक्षी टीम को कीड़ा समझने की उसकी मानसिकता मिट्टी में मिल गई है। हरभजन तथा अन्य भारतीय खिलाड़ियों को उकसाने वाली ऑस्टेलियाई खिलाड़ियों की सारी तरकीबें व्यर्थ हो गई। भारत अब विजेता है। क्रिकेट पर आस्ट्रेलिया के एकाधिकार के दिन लद चुके हैं। आस्ट्रेलिया की टीम अब ढलान पर खड़ी है। उसके आक्रमण में पहले जैसा पैनापन नहीं रहा है। टीम के अधिकांश खिलाड़ी पकी आयु के हैं। दूसरी आेर भारतीय टीम है जो युवा प्रतिभाआें से भरी पड़ी है। हमारी ‘बैंच स्ट्रैंथ’ मजबूत है। एक-एक स्थान के लिए कई-कई नाम गिनाए जा सकते हैं। यह भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम भविष्य का संकेत है। देश में लोकप्रियता और कमाई के मामले में तो क्रिकेट अपने शिखर पर है, प्रदर्शन के मोर्चे पर भी टीम चोटी के निकट खड़ी है। पिछले विश्वकप में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद लगा था कि भारत को संभलने में काफी वक्त लगेगा। लेकिन सफलताआें का ऐसा समा बंधा कि उससे हवा बिल्कुल बदल गई। आस्ट्रेलिया को फाइनल के दो मुकाबलों में लगातार हराना मामूली उपलब्धि नहीं है। बाइस बरस पहले आस्ट्रेलिया की धरती पर ‘चैंपियंस आफ दि चैंपियन’ का ताज जीतने वाली भारतीय टीम के तत्कालीन कप्तान सुनील गावस्कर और उनके साथी रवि शास्त्री भी धोनी के दल के मुरीद बन गए हैं। आज पूरे देश को अपनी क्रिकेट टीम पर गर्व है।

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