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सरकार को सुध आई ट्रांसमिशन दुश्वारियों की

देश में बिजली ट्रांसमिशन तथा वितरण से संबंधित समस्याएं सरकार के लिए एक मुद्दत से परेशानी का सबब बनी हुई हैं। बिजली क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि ट्रांसमशिन और वितरण में सुधार के लिए राष्ट्रीय कोष बनाये जाने से काफी हद तक इनसे जुड़ी समस्याएं खत्म हो सकती हैं। बिजली के टांसमशिन तथा वितरण में भारी निवेश की जरुरत को देखते हुए सरकार ने आम बजट 2008-0में एक राष्ट्रीय कोष का गठन करने की घोषणा की है जिसका ब्योरा जल्द तैयार कर उसका ऐलान किया जाएगा। सरकार ने ट्रांसमिशन व वितरण के दौरान होने वाली हानि को रोकने के लिए चल रहे त्वरित विद्युत विकास और सुधार परियोजना के लिए 2008-0मंे 800 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए हैं। इसके अतिरिक्त, बिजली की चोरी से हर वर्ष होने वाले करोड़ो रुपए के नुकसान पर अंकुश लगाने के लिए सरकार इसका लेखा जोखा रखने वाली कंप्यूटर आधारित एक नई प्रणाली भी जल्द ही पूरे देश में लागू करेगी। ट्रांसमिशन की खामियों तथा चोरी के कारण करीब 35 प्रतिशत बिजली का नुकसान होता है जिसे अगले पांच वर्ष में कम कर 15 प्रतिशत लाने का लक्ष्य रखा गया है। इस काम पर लगभग एक लाख करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इतनी बड़ी मात्रा में पूंजी लगाने से पहले ऐसी प्रणाली लागू करना जरुरी है जिससे प्रबंधकों को पता लग सके कि कहां और कितना नुकसान हुआ है। पर बिजली सुधार के प्रति सरकार खासकर बिजली मंत्रालय कितनी सक्रिय है इसका एक नमूना त्वरित बिजली विकास तथा सुधार कार्यक्रम (एपीडीआरपी) है। बिजली मंत्रालय ने 2002-03 में एपीडीआरपी की शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य बिजली की समेकित तकनीकी एवं व्यावसायिक हानियों में कम लाना तथा राज्य बिजली केन्द्रों की राजस्व वसूली में ठोस वृद्धि करना था। यह कार्यक्रम बिजली से संबंधित सब-ट्रांसमिशन तथा वितरण नेटवर्क से संबंधित परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए एक अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता के रूप में शुरू किया गया था। दसवीं पंचवर्षीय योजना अवधि में इस कार्यक्रम का कुल आउटले 40 हजार करोड़ रुपये था जिसमें से 20 हजार करोड़ रुपये निवेश के लिए तथा इतनी ही रकम प्रोत्साहन देने वाले कार्यक्रमों के लिए था। मार्च 2006 तक मंत्रालय ने 10.46 करोड़ की कुल परियोजना लागत की 583 परियोजनाओं के लिए 6131.70 करोड़ रुपये जारी किए जिसमें से कथित उपयोगिता 07.20 करोड़ रुपये (समकक्ष अंश निधि समेत) थी। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना की निष्पादन लेखापरीक्षा से यह बात जाहिर हुई कि प्रति वर्ष प्रतिशत तक तकनीकी एवं व्यवसायिक (एटीएंडसी) नुकसान कम करने का लक्ष्य भी नहीं पूरा हुआ तथा सिस्टम मीटरिंग (खासकर वितरण ट्रांसफार्मर मीटिरिंग) तथा उपभोक्ता मीटरिंग में गंभीर त्रुटियां थीं। यही नहीं, बिजली सप्लाई की क्वालिटी तथा विश्वसनीयता में भी कमी थी जबकि एपीडीआरपी कार्यक्रम में इसका लक्ष्य भी निर्धारित किया गया था।

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  • Web Title: सरकार को सुध आई ट्रांसमिशन दुश्वारियों की