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बहाना नहीं, पंचायत चुनाव कराये सरकार

वाम दलों ने राज्य में शीघ्र पंचायत चुनाव कराने पर जोर दिया है। मंगलवार को इस मुद्दे पर माकपा राज्य कार्यालय में वाम दलों की बैठक में सरकार पर दवाब बढ़ाने का निर्णय लिया गया। बैठक के बाद माकपा के राज्य सचिव ज्ञानशंकर मजुमदार और भाकपा राज्य कमेटी के सह सचिव केडी सिंह ने प्रेस कांफ्रेस में बताया कि पंचायत चुनाव को लेकर संयुक्त रूप से झारखंड के सभी विधायकों को स्मार पत्र दिया जायेगा। अगले महीने अप्रैल में बिरसा चौक पर वाम पार्टियां तीन दिवसीय धरना देंगी। वाम दलों की बैठक में भाकपा (माले) को छोड़ कर भाकपा के अजय, माकपा से प्रकाश विप्लव, डीडी रामानंदन, मासस के मिथिलेश सिंह, सुशातो विनोद रजक, फाब्ला के मधुसूदन भट्टााचार्य और आरएसपी के सीताराम दुबे, राधाकांत झा, उत्पला मित्रा शामिल थे।ड्ढr मजुमदार ने बताया कि पंचायत चुनाव को लेकर सरकार का रुख नहीं बदला, तो वाम दल आंदोलन तेज करेंगे। उन्होंने कहा कि संवैधानिक आदेश के बाद भी झारखंड में पंचायत चुनाव नहीं कराया गया है। सरकार की यह टिप्पणी भ्रामक है कि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण पंचायत चुनाव नहीं कराया जा सका है। सरकार सुप्रीम कोर्ट जाकर यह बताये कि वह पेसा के तहत चुनाव कराना चाहती है और झारखंड भारत के वैसे अन्य आठ राज्यों में शामिल है, जहां पेसा अधिनियम लागू है। वाम दलों ने सरकार से मांग की है कि वह विधानसभा के वर्तमान सत्र में झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 में महिलाओं के लिए आरक्षण में आवश्यक संशोधन करे। मजुमदार ने कहा कि पंचायत चुनाव नहीं होने से ग्रामीण विकास का काम बाधित हो रहा है। नरेगा के ठीक ढंग से प्रभावी नहीं होने का यह प्रमुख कारण है। ग्रामीण केंद्रीय सहायता से भी वचिंत हो रहे हैं। मजुमदार ने बताया कि पंचायतों की गैरमौजूदगी में वन अधिकार कानून भी लागू नहीं हो रहा है।

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